सदर अस्पताल में ठंड में भी पूछ रहे मरीज कि पानी कहां है, आरओ बंद, चापाकल भी खराब
आप या आपके परिजन बीमार हैं और जिला अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ रही हो तो घर से पानी साथ लेकर जाएं। क्योंकि, अस्पताल में मरीजों के पीने योग्य पानी नहीं है। अस्पताल की ओपीडी में बने बाथरूम में भी पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे यहां भर्ती प्रसूताएं व मरीज गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। लेकिन जिला अस्पताल के जिम्मेदारों को कोई फिक्र नहीं है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब एक हजार मरीज पहुंचते हैं। इनके अलावा लगभग एक दर्जन गर्भवती महिलाएं भी यहां प्रसव के लिए आती हैं। लेकिन, अस्पताल में पानी का कोई खास इंतजाम नहीं है। अगर, कहीं भी पीने के पानी की व्यवस्था है भी तो वह पीने के लायक नहीं है। क्योंकि जिस टंकी से वाटर कूलर में पानी आता है उसे पिछले दो महीने से साफ नहीं किया गया है। ओपीडी के बाथरूम में भी पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। बाथरूम में बने वाशवेशिन में कपड़े आदि भरे रहते हैं। ओपीडी के बाहर आठ साल पहले चापाकल लगाया गया था। जो खराब पड़ा है। उसे ठीक कराने के लिए अस्पताल प्रबंधक ने कभी नहीं सोचा। इसके कारण ओपीडी में आए मरीज पानी के लिए एक-दूसरे से पूछते फिरते हैं कि यहां पीने का पानी कहां मिलेगा।
गंदा पानी पीने से संक्रामक रोग फैलने का खतरा
अस्पताल में भर्ती और इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भले ही चिकित्सकों द्वारा पेयजल को स्वच्छ कर पीने की सलाह दी जाती हो लेकिन अस्पताल में मरीजों को ही शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है। अस्पताल में पानी के लिए नल और टैंक लगाया गया है। इससे कभी-कभार ही पानी निकलता है। स्वास्थ्य विभाग भी लोगों को साफ तथा स्वच्छ पानी पीने के लिए जागरूक करता है। उन्हें बताया जाता है कि गंदा पानी पीने से संक्रामक रोग फैल सकता है। समय-समय पर टंकी की सफाई करने की जानकारी दी जाती है। क्योंकि, ज्यादा दिनों तक पानी भरे रहने से उसमें कीटाणु आदि हो जाते हैं, जो पानी पीते ही शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और बीमारियों को दावत देते हैं। उन्हें साफ-सफाई करने के लिए भी जागरूक किया जाता है।
सीएस कार्यालय के बाहर लगा आरओ कोई काम का नहीं, सात माह से है खराब
सीएस कार्यलय के सामने पिछले सात महीने से आरओ की स्थिति खराब है। जबकि इसी रास्ते से अस्पताल के मैनेजर, कर्मी व डाॅक्टराें का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन, किसी का ध्यान इस ओर नहीं जाता है। जाए भी क्यों, खुद पानी पीने के लिए ब्रांडेड सील बोतल चेंबर में आ जाती है। जब खुद की व्यवस्था दुरुस्त हो तो मरीजों के लिए क्या सोचना।
बाहर से खरीद ले लो पानी
जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए मरीज व परिजन पानी के लिए भटकते दिखते हैं। कई बार तो परिजन अगल-बगल पूछते हैं कि पानी की व्यवस्था कहां है। सामने खड़े लोगों का जवाब आता है कि बाहर पानी बिक रहा है।
चापाकल से पानी की जगह हवा निकलती है
अस्पताल में पानी को लेकर कुव्यवस्था गेट के पास से ही दिखने लगती है। मुख्य द्वार पर लगाया गया चापाकल दो साल से भी ज्यादा समय से खराब है। ग्रामीण क्षेत्र से आए लोग चापाकल चला कर पानी निकालने का प्रयास करते हैं। लेकिन, उसके से पानी की जगह हवा निकलती है।
जल्द होगी पानी की व्यवस्था
अस्पताल में पानी की समस्या को लेकर मुझे मालूम नहीं था। जो आरओ बंद है उसे एक से दो दिन में ठीक करा लिया जाएगा। सभी चापाकल भी ठीक कराकर मरीजों व परिजनों के लिए शुद्ध पानी की व्यवस्था करा दी जाएगी।
डॉ यदुवंश कुमार शर्मा, सिविल सर्जन
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