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लॉकडाउन में मृतकों के नाम पर काम कराकर सरकारी रुपए निकालने में फंसी मुखिया, शोकॉज

लॉकडाउन में मृतकों के नाम पर काम कराकर सरकारी रुपए निकालने में फंसी मुखिया, शोकॉज

लॉकडाउन के दौरान मृत लोगों से मनरेगा में काम कराकर उसके नाम पर अवैध रूप से सरकारी राशि की निकासी करने के मामले में जांच पूरी कर ली गई है। मामला उदाकिशुनगंज प्रखंड क्षेत्र के पिपरा करौति पंचायत से जुड़ा हुआ है। इसे लेकर सभी संबंधितों के साथ-साथ पंचायत की मुखिया मीना देवी को भी शो-कॉज भेजा गया है। डीएम नवदीप शुक्ला द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मनरेगा योजनाओं के अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण की पूर्ण जिम्मेवारी ग्राम पंचायत कार्यान्वयन निकाय की है। योजना में अनियमितता होना इंगित करता है कि मुखिया द्वारा योजना के अनुश्रवण में लापरवाही बरती गई है। क्यों नहीं इस कृत के लिए जुर्माना सहित राशि वसूली करते हुए पंचायतीराज अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए पंचायतीराज विभाग को प्रतिवेदित कर दिया जाए। डीएम ने मुखिया से अपना स्पष्टीकरण पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर अद्योहस्ताक्षरी को समर्पित करने को कहा है। निर्धारित अवधि तक स्पष्टीकरण अप्राप्त रहने की स्थिति में यह मानते हुए कि इस संबंध में कुछ नहीं कहना है, एक पक्षीय कार्रवाई कर विभाग को सूचित कर दिया जाएगा। विदित हाे कि पंचायत के संजीव कुमार ने पिछले माह सात मृत लोगों के नाम पर मनरेगा में काम दिखाकर अवैध रूप से राशि की निकासी कर लेने का आरोप पंचायत की मुखिया और उनके परिवार के लोगों पर लगाया था।

अवैध राशि की निकासी की गई है
डीएम द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मनरेगा अंतर्गत क्रियान्वित योजना पर मृत व्यक्तियों के नाम पर अवैध रूप से राशि निकासी की शिकायत परिवादी संजीव कुमार यादव ने की थी। उनका आरोप था कि पिपरा करौती पंचायत में मनरेगा योजना में मृत व्यक्ति का नाम दिखाकर अवैध रूप से राशि निकासी की गई है। मामले की जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया है कि सात मृत व्यक्तियों को कार्य आवंटित कर उनकी उपस्थिति मस्टर राॅल पर चढ़ाया गया, जिसने कार्य नहीं किया है। साथ ही जॉबकार्ड के साथ गलत खाता की मैपिंग कर राशि की निकासी करना मनरेगा प्रावधानों के विपरीत और सरकारी राशि के दुरुपयोग व वित्तीय अनियमितता काे दर्शाता है।

बदनाम करने की साजिश, पूरा मामला राजनीति से प्रेरित है
यह मामला राजनीति से प्रेरित है। कुछ लोग पंचायत की राजनीति को लेकर मुखिया को बदनाम करने की साजिश किए हैं। डीएम द्वारा शो-कॉज भेजे जाने की फिलहाल जानकारी नहीं है। शो-कॉज का जवाब जिलाधिकारी को दिया जाएगा।
छोटेलाल पोद्दार, मुखिया पति

सात मृत लोगों के नाम पर हुई राशि की निकासी
शिकायतकर्ता संजीव कुमार का कहना है कि उन्होंने फिलहाल सात लोगों की जानकारी विभाग को दी थी। इसका सत्यापन पंचायत के सरपंच ने भी की है। उन्होंने कहा कि मुखिया के बेटों के नाम से सीएसपी संचालित किया जाता है। ये लोग गांव के गरीब लोगों का खाता खोलकर रखे हुए हैं। इन्हीं खातों में मरे हुए लोगों के नाम की मजदूरी का उठाव करते हैं। दूसरी ओर, वार्ड-5 छर्रापट्‌टी निवासी नीतेश कुमार सिंह का कहना था कि उसके पिता पिता अशोक सिंह की मौत वर्ष 2003 में हुई थी। अब पता चला है कि उनके नाम पर मनरेगा में फर्जी रूप से काम कराकर मजदूरी की निकासी कर ली गई है। जबकि डब्ल्यू कुमार का कहना था कि उनके दादा साधू प्रसाद यादव का निधन 20 साल पूर्व हो गया था। लेकिन उनके नाम से फर्जी जॉब कार्ड बनाकर मनरेगा में मजदूरी कराकर रुपए की निकासी की गई।



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मामले के शिकायतकर्ता व पीड़ित परिजन। जिनके लोगों के नाम पर की गई राशि की निकासी।


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