बच्ची की हत्या हुई या बीमारी से माैत, पुलिस नहीं ले पाई निर्णय; तीन साल की आरुषि की मौत का मामला उलझा
तीन वर्षीय आरुषि की मौत का मामला उलझ गया है। पुलिस यह निर्णय नहीं ले पाई है कि आरुषि की हत्या हुई है या बीमारी से उसकी मौत हुई थी।बच्ची के अपहरण के आरोप में गिरफ्तार सौतेले पिता राजू सिंह (भिट्ठी, सबौर) ने सोमवार को जेल जाते समय फिर दोहराया कि बीमारी से आरुषि की मौत हुई थी। उसकी हत्या नहीं हुई है।
हां, लाश को भिट्ठी-जमसी रोड के बहियार में फेंक दिया था। अगर आरुषि की हत्या करता तो फिर घटनास्थल ले जाकर उसका फ्रॉक पुलिस से क्यों बरामद करवाता। आरोपी राजू का दावा है कि 6 सितंबर को आरुषि को कोयला घाट से लेकर निकले और भीखनपुर पहुंचे।
भीखनपुर में रंगाई-पुताई का काम चल रहा था। दोपहर में काम खत्म कर आरुषि को भिट्ठी ले गए और दूसरे दिन उसकी मौत हो गई। उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। फतेहपुर गांव में बाबा के पास ले जाकर झाड़-फूंक भी करवाया था। मौत के बाद आरुषि की लाश गांव के पास बहियार में ले जाकर फेंक दिया था।
बहियार से जब्त हुई है फ्रॉक
उधर, आरुषि की मां प्रीति देवी, नाना राम स्वरूप पासवान और मामा अमित आदि का आरोप है कि सौतेले पिता ने आरुषि की हत्या की है। बहियार में जहां आरुषि का फ्रॉक मिला, वहां हडि्डया और सिर का कंकाल इस बात के सबूत हैं। लेकिन पुलिस हड्डी और सिर के कंकाल को सबूत नहीं मान रही है। क्योंकि वह कह रही है कि एक सप्ताह में बच्ची की लाश कंकाल में तब्दील कैसे होगा। पुलिस ने बहियार से सिर्फ बच्ची की फ्रॉक को जब्त किया है, जिसकी एफएसएल से जांच कराई जाएगी।
पुलिस ने आरोपी सौतेले पिता को कोर्ट में पेश किया
उधर, बच्ची के अपहरण के आरोप में जोगसर पुलिस ने आरोपी सौतेले पिता को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। बता दें कि बच्ची की मां प्रीति देवी ने अपने दूसरे पति पर आरुषि के अपहरण की रिपोर्ट जोगसर थाने में दर्ज कराई है। अब तक बच्ची का पता नहीं चल पाया है। लेकिन बहियार में उसका फ्रॉक मिलने से आरोपी सौतेले पिता की बात पुष्टि होती नजर आ रही है। हालांकि अभी पुलिस यह निर्णय नहीं ले पाई है कि आरुषि की हत्या हुई है या बीमारी से उसकी मौत हुई थी।
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