जीवित पुत्रिका पर्व आज घर-घर में की गई तैयारी
जीवित पुत्रिका व्रत अर्थात जीउतीया पर्व को लेकर प्रखंड क्षेत्र के घर घर में तैयारी जोरों पर हैं। प्रखंड मुख्यालय सहित आसपास के बाजारों में भीड़भाड़ देखी गयी।खासकर किराना,दुध और फल के दुकानों पर भीड़ रही। वही बुधवार को महिलाएं सुबह में अरवा चावल, अरहर का दाल और झिगुनी की सब्जी का सेवन करते हुए व्रत का शुरुआत किया। संतान के दीर्घायु और उसकी रक्षा के लिए महिलाएं इस पर्व को करती हैं। इस पर्व में महिलाएं पितरों की पूजा और ओरी के पास झिगुनी के पत्ता पर खरी के साथ पूजा-अर्चना करती हैं।
यह पर्व जीवित पुत्र के लिए रखा जाने वाला है। मान्यता है कि जीउतीया पर्व महिलाएं रखती हैं जिन्हें पुत्र होते हैं। बच्चों की लंबी उम्र के लिए इस व्रत को रखा जाता है । जिसे जीउतीया भी कहा जाता है। आचार्य सुनील मिश्रा ने बताया कि यह पर्व कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। इस पर्व महिलाएं अपने पुत्र और पति की लंबी आयु के लिए किया करती हैं। इसमें जीमूत वाहन की कथा सुनी जाती है। कथा में जीमूत वाहन के अदम्य साहस से नाग जाति की रक्षा हुई और सबसे पुत्र की रक्षा के लिए और तब से पुत्र की रक्षा के लिए जीमूत वाहन की पूजा की प्रथा चली आ रही है।
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