सिकरहना नदी में आई बाढ़ के बाद कटाव से राहत के लिए ग्रामीण 5 दिनों से कर रहे हैं प्रदर्शन, किसी ने नहीं ली सुधि
बरसात व बाढ़ के समय सिकरहना नदी के लगातार कटाव से चिंतित ग्रामीणों ने स्थानीय मुखिया पति व समाजसेवियों के साथ पांचवें दिन भी धरना स्थल पर बैठे रहें। परन्तु इन पांच दिनों में कोई भी पदाधिकारी धरनास्थल पर जाकर जनता के दुखदर्द को सुनना मुनासिब नही समझा।सिकरहना कटाव मुक्ति संघर्ष समिति के बैनर तले शनिवार से इस धरने की शुरुआत हुई थी। नदी किनारे धरना स्थल पर बैठे लोगों का कहना है कि विगत कई वर्षों से बाढ़ व बरसात के समय सिकरहना नदी लगातार कटाव करते-करते नदी से सटे गांव के किनारे तक पहुँच गई है, लेकिन अभी तक कोई भी जनप्रतिनिधियों ने नदी किनारे बांध बनवाना उचित नहीं समझा ना ही इस दिशा में कोई सरकारी स्तर से कार्रवाई हुई।
बरसात के समय मे जलस्तर बढ़ने व कटाव के कारण बच्चों से बूढ़े तक लोगों को हर समय डर सताता रहता है। इतना ही नहीं लोगों ने यह भी कहा कि बाढ़ व चुनाव के समय अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक क्षेत्र भ्रमण कर लोगों को आश्वस्त करते हैं कि बहुत जल्द बांध बनेगा लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात रहा है। धरने पर बैठे मुखिया पति कुदरुश कुरैशी ने कहा कि कई बार संबंधित अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को बांध बनवाने के लिए पत्र लिखा गया लेकिन अभी तक सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। बाढ़ के कटाव के कारण तुलाराम घाट,सिसवनिया,हरिहरपुर आदि गाँव नदी में विलीन होने के कगार पर है। मौके पर संघर्ष समिति के अध्यक्ष जवाहर प्रसाद, हीरालाल सिंह, बृजकिशोर पाण्डेय, नथुनी दास,ओमप्रकाश बैठा, श्रीमान मिश्र आदि मौजूद रहे।
कटाव के कारण तुलाराम घाट, सिसवनिया व हरिहरपुर गांव नदी में विलीन होने की कगार पर है
2017 में आई प्रलयंकारी बाढ़ के बाद कटाव में आई तेजी
वैसे तो सिकरहना नदी हर साल बरसात के समय कटाव करता आ रहा है। परंतु 2017 में आई भयंकर बाढ़ के कारण नदी अपने वास्तविक बहाव को छोड़कर दक्षिण तरफ कटाव करते हुए गावं के नजदीक आ पहुंचा। उस समय तत्कालीन बीडीओ व सीओ द्वारा उक्त कटाव का निरीक्षण किया गया था और बांस की चचरी व बालू की कुछ बोरी रखकर खानापूर्ति कर ली गई।जो कि इस साल के बाढ़ में बह गया।
एसडीओ, बीडीओ व सीओ ने भी किया था निरीक्षण
हाल के दिनों में बाढ़ के कुछ ही समय पहले एसडीओ, बीडीओ, सीओ व सिकरहना नदी विभाग के सीनियर इंजीनियर ने कटाव स्थल का निरीक्षण किया था और ठोकर बांध निर्माण की बात कही। परंतु बाढ़ आया और चला भी गया, लेकिन अभी तक उसके बाद से कोई पदाधिकारी इस ओर देखने तक नहीं आया।
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