राम मंदिर के भूमि पूजन से देश के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जुड़ रहा
उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा है कि अयोध्या में भव्य मंदिर के भूमि पूजन के साथ भारत के सांस्कृतिक-सामाजिक-राजनीतिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ रहा है। मंगलवार को ट्वीट कर कहा कि प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद ने 1952 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के प्रबल विरोध के बावजूद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का समर्थन करते हुए प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में भाग लिया था।
आज उसी तरह नेहरूवादी कांग्रेस के तर्कहीन विरोध की चिंता किए बिना भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी मंदिर के लिए भूमिपूजन करने जा रहे हैं। मोदी ने कहा कि अल्पसंख्यक-तुष्टीकरण की राजनीति का सूत्रपात करने वाले नेहरू ने भारत की सनातन परंपरा और हिंदुओं की आस्था के प्रतीक मंदिर पुनर्निर्माण को हिंदू पुनरुत्थानवाद बताया था।
जबकि उनकी सरकार में मंत्री रहे केएम मुंशी ने मंदिर को सामूहिक भारतीय चेतना का प्रतीक माना था। मोदी ने कहा कि पहला आमंत्रण बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकार इकबाल अंसारी को मिलना और अंसारी का इसे भगवान श्रीराम की इच्छा के रूप में स्वीकार करना सच्ची धर्मनिरपेक्षता है।
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