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खिलाड़ियों के हाथों में हॉकी स्टिक और बॉल तो थमा दिए लेकिन अभ्यास के लिए जिले में अब तक स्तरीय मैदान नहीं

खिलाड़ियों के हाथों में हॉकी स्टिक और बॉल तो थमा दिए लेकिन अभ्यास के लिए जिले में अब तक स्तरीय मैदान नहीं

आज राष्ट्रीय खेल दिवस है। हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद का जन्म दिन। हॉकी यानी हमारा राष्ट्रीय खेल। अफसोस तब होता है जब इसे खेलने वाले बच्चों के हाथों में हॉकी स्टिक और बॉल तो थमा दिया गया लेकिन उन्हें अभ्यास करने के लिए एक स्तरीय मैदान तक जिले में उपलब्ध नहीं है। मध्य विद्यालय रोहुआ की जमीन के 2.66 एकड़ में से 1.99 एकड़ में हॉकी स्टेडियम का निर्माण होना था।

शिक्षा विभाग के निदेशक ने इसके लिए दिसंबर में ही अनुमति दे दी। लेकिन अब तक यह आगे नहीं बढ़ सका है। हॉकी प्रशिक्षक मनोज कुमार ने बताया कि सिंथेटिक मैदान की लंबाई 91.2 मीटर और चौड़ाई 55 मीटर होती है। सभी स्तरीय मैच इसी मैदान पर खेले जाते हैं। इसपर अभ्यास करने से खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए खुद को तैयार कर पाते हैं।

जिला खेल पदाधिकारी जयनारायण कुमार ने बताया कि स्टेडियम बनाने के लिए डीपीआर बनाए जाने से लेकर अन्य कार्य के लिए एक्सपर्ट कमेटी का निरीक्षण होना था लेकिन कोरोना संकट के कारण फिलहाल आगे नहीं बढ़ सका है। बताया कि कोरोना संकट के कारण इस वर्ष किसी खेल का आयोजन नहीं होगा। राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी वीडियो कांफ्रेंसिंग से निदेशालय में होने वाले कार्यक्रम से जुड़ेंगे।

अलग जमीन लेकर हो नए स्टेडियम का निर्माण
स्मार्ट सिटी के तहत शहर के लिए स्टेडियम का निर्माण होना है। लेकिन खेल से जुड़े लोगों की माने तो वे नेहरू स्टेडियम को मॉडर्न बनाए जाने के बदले नए स्टेडियम के निर्माण के पक्षधर हैं। जिला खेल समन्वयक अनिल कुमार सिन्हा ने बताया कि नेहरू स्टेडियम की दुर्दशा ऐसी हो गई है कि अगर उसका जीर्णोद्धार भी हो जाए तो आसपास अतिक्रमण से लेकर सरकारी भवनों के कारण गैलरी तक पहुंच नहीं हो सकेगी। ऐसे में नई जगह जमीन देख कर व डीपीआर तैयार कर स्टेडियम का निर्माण कराया जाए। जहां सभी सुविधाएं उपलब्ध हों।

आधारभूत खेल सुविधाओं के अभाव के बावजूद राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दम दिखा चुके हैं जिले के खिलाड़ी
जिले में संचालित होने वाले राज्य आवासीय एकलव्य प्रशिक्षण केंद्र हॉकी बालक के खिलाड़ी आधारभूत संरचना नहीं होने के बाद भी नेशनल तक अपना दम-खम दिखा चुके हैं। पिछले वर्ष दिसंबर में नेहरू कप के क्वार्टर फाइनल लीग मैच में हिस्सा लेने वाली यह बिहार की पहली टीम बनी।

वहीं, ऑल इंडिया चंद्रदीप सिंह हॉकी मेमोरियल टूर्नामेंट में सेमीफाइनल तक गई। बनारस स्पोर्ट्स हॉस्टल जैसी मजबूत टीम को हराया। सेंटर के मोनू कुमार, जितेंद्र पूर्ति, विकास यादव, आशुतोष कुमार, विमल बरजो जैसे खिलाड़ी मेहनत से अपनी किस्मत लिख रहे हैं। विमल बरजो और जितेंद्र पूर्ति को नेहरू कप के दो मैच में बेस्ट-22 चुना गया था। वहीं एकलव्य गेम्स से लेकर राज्यस्तरीय सभी प्रतियोगिता में एकलव्य की टीम 2017 से चैंपियन रही है।
नेहरू स्टेडियम से लेकर खुदीराम बोस फुटबॉल मैदान बेहाल: हॉकी ही नहीं बल्कि क्रिकेट के लिए भी शहर में कोई मैदान या स्टेडियम नहीं है। क्रिकेट कॉलेजों के मैदानों तक सिमटा हुआ है। नेहरू स्टेडियम की स्थिति जर्जर है। खुदीराम बोस फुटबॉल मैदान में भी जैसे-तैसे मैच कराए जाते हैं।



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Hockey sticks and balls were handed over in the hands of the players, but for the practice, no ground level in the district yet


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