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भारतीय क्षेत्र में बेराेक-टाेक प्रवेश कर रहे नेपाली मूल के लोग, नहीं होती जांच

भारतीय क्षेत्र में बेराेक-टाेक प्रवेश कर रहे नेपाली मूल के लोग, नहीं होती जांच

इंडो-नेपाल बॉर्डर पर अवस्थित भेड़िहरवा गांव के रास्ते पिलर संख्या 422/40 से हो रहे तस्करी के गोरखधंधा पर अंकुश नहीं लगी तो कभी भी स्थति गडबड़ हो सकता है। बताया जाता हैं कि 16 जुलाई की शाम को खाद तस्करी को लेकर भारतीय क्षेत्र के भेड़िहरवा गांव और नेपाल भेड़िहरवा गांव के कतिपय लोग आपस में उलझ गए थे। एसएसबी और पुलिस के पहुंचने पर मामला को शांत कराया गया था। फिर उसी घटना की पुनरावृत्ति करते हुए 6 अगस्त के शाम को धान कुटाने के लिए जा रहे युवक को नेपाली पुलिस के द्वारा रोक दिया गया। जिससे खफा भारतीय क्षेत्र के कतिपय लोगों के द्वारा नेपाल जाने वाली रास्ता को बांस बल्ला लगाकर अवरुद्ध कर दिया गया था। एसएसबी के पहल से बंद रास्ते को फिर से खुलवाया गया।

विदित हो कि भेड़िहरवा गांव से खाद, धान, डीजल, मवेशी आदि की तस्करी चरम पर हैं।तस्करी के धंधे में दर्जनों लोग लिप्त भी हैं। तस्करी जैसे धंधे में लगे लोगों को कहीं कोई परेशानी आने पर मामला उलझ जाता है।और वह मामला को दोनों देश का रंग दे दिया जाता है।यहां तक कि भेड़िहरवा गांव से अपराहन के दो बजते ही देर शाम तक शराबियों की बाईक नेपाल के भेड़िहरवा में दौड़ने लगती है। कोई रोक-टोक नहीं होने से तस्करों सहित शराबियों के हौसले बुलंद है।



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People of Nepali origin entering the Indian territory of Beraq-tec, no investigation


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