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जमींदारी प्रथा के विरुद्ध जंग लड़ने वाले कुमारी तिवारी थाना को जलाने में हुए थे गिरफ्तार

जमींदारी प्रथा के विरुद्ध जंग लड़ने वाले कुमारी तिवारी थाना को जलाने में हुए थे गिरफ्तार

अंग्रेजी हुकूमत व जमींदारी प्रथा के खिलाफ डुमरांव में क्रांति का बीजरोपण करने वाले कुमारी बाबा के संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता है। आजादी के दीवानों में अपनी अलग पहचान रखने वाले रामकुमार त्रिपाठी उर्फ कुमारी तिवारी के नेतृत्व में बेयायी व बेगारी एवं जंगल फाटक तोड़ो जैसे कई गंभीर लड़ाइयां लड़ी गई। डुमरांव के मच्छहट्टा टोली के पुराना वार्ड नंबर 8 में भारतीय भवन के नाम से प्रसिद्ध भवनाथ तिवारी के घर 1897 में जन्मे रामकुमार त्रिपाठी उर्फ कुमारी तिवारी जो कि 5 भाषाओं के ज्ञाता थे।

जो आजादी की लड़ाई में साढ़े 3 साल तक की सश्रम सजा काटी। इस दौरान 12 अक्टूबर 1942 को बक्सर कारा में प्रवेश किए। जहां से 15 नवंबर 1943 को इन्हें रिहा किया गया। इसके पहले 23 जून 1930 को ऑर्डिनेंस एक्ट फाइव के तहत विचाराधीन बंदी के रूप में उपकारा बक्सर आए जिन्हें 24 जून 1930 को बक्सर के तत्कालीन अनुमंडल अधिकारी के इजलास से छह माह की सश्रम सजा सुनाते हुए 26 जून 1930 को भागलपुर केंद्रीय कारा स्थानांतरण कर दिए गए।

जब हावड़ा से गिरफ्तार हुए थे कुमारी तिवारी
आजादी के दीवाने कुमारी तिवारी ऐसे शख्स थे डुमरांव थाना बरहरा आदि को जलाने समेत कई मामले में वांछित थे। जिनकी गिरफ्तारी हावड़ा से की गई। महात्मा गांधी व राजेंद्र बाबू के करीबी माने जाने वाले कुमारी तिवारी की गिरफ्तारी के बाद आजादी के दीवानों के बीच आजादी के दीवानों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

चुटुर राय और कुमारी तिवारी की चली थी जोड़ी
अंग्रेजी हुकूमत व जमींदारी प्रथा के विरुद्ध लड़ाई छेड़ने वाले चुटुर राय और कुमारी तिवारी दोनों एक जान और दो देह थे। इन दोनों की जोड़ी ऐसी थी वेशभूषा भी अपना एक ही जैसा रखे थे। कुमारी तिवारी के साथ साथ चुटुर राय भी जंगल फाटक तोड़ो जमीदारी प्रथा के बेयायी प्रथा तथा बेगारी प्रथा के खिलाफ जंग लड़ा। किसान आंदोलन तथा जंगे आजादी के महानायक को में से एक थे। आजादी के लड़ाई के क्रम में जब यह दोनों घायल हुए तो इनका हालचाल जानने के लिए बक्सर के अस्पताल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी खुद पहुंचे थे। आजादी के इन दोनों दीवानों को जो कुमारी तिवारी के नाम से प्रसिद्ध है।

त्रिकोणीय मैदान से जुड़ी हैं गांधीजी की स्मृतियां, 1921 में की थी सभा
देशभक्ति के जज्बे को देख राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 1921 में डुमरांव पहुंचकर त्रिकोणीय मैदान में जनसभा किया था। गांधी जी के भाषण से प्रेरित होकर नौजवान विदेशी वस्तुओं को जलाकर खादी वस्त्र को धारण किया था। जहां कि धरती पर सन् 1942 को पुराना थाना चौकी के समीप चार देशभक्त शहीद हुए थे। जिनमें कपिल मुनी, गोपाल जी, रामदास सोनार, रामदास लोहार थे। असहयोग आंदोलन में यहां के राम कुमार त्रिपाठी व चुटुर राय भी शामिल रहे वैसे गांधी गांधीजी के अहिंसावादी लड़ाई में डुमरांव के आठ सेनानियों को सत्याग्रह की मंजूरी मिली। जिसमें चुटुर राय, रामकुमार तिवारी, नारायण प्रसाद ,शिवपूजन सिंह चौधरी कपिलदेव राय हरिहर नाथ गुप्ता और जवाहर लाल श्रीवास्तव प्रमुख रूप से थे। स्वतंत्र सेनानियों में दुर्गा सिंह के भतीजे सतनारायण प्रसाद बताते हैं कि महात्मा गांधी ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार तथा शराबबंदी पर भाषण देकर सभी को आंदोलित कर दिया था।



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