अगस्त क्रांति के अगुवा 98 वर्षीय कवि सौरभ की जनता से अपील- अंग्रेजी हुकूमत से लड़ी गई जंग की तरह ही अब लड़ना होगा कोरोना से
कटिहार में आजाद दस्ता सशक्त क्रांतिकारी पार्टी के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के छक्के छ़ुड़ा दिए थे। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रहे कटिहार के दुर्गा स्थान निवासी 98 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी सत्यनारायण सौरभ उर्फ कवि सौरभ जिले के अग्रदूत थे। भास्कर से खास मुलाकात में उन्होंने बताया कि अंग्रेजों से बचने के लिए उन्हें मनिहारी, कुरसेला, बरारी, अमदाबाद के दियारा में छुपना पड़ता था।
आंदोलन के दौरान पुलिस की दबिश बढ़ने पर सेनानी वेश बदलकर एक जगह से दूसरी जगह जाते थे। वह खुद कभी मछुआरे, किसान, पंडित एवं मौलाना का वेश बनाकर जगह बदलते थे। उन्होंने बताया कि अगस्त क्राति ही अजादी का असली शंखनाद था। आज कोरोनाकाल में भी वैसे ही शंखनाद की जरूरत है।
कोरोना के खिलाफ जंग को सकारात्मक नजरिए और पल-पल के सदुपयोग करते हुए लड़ना होगा। कोरोना काल में सौरभ जी ने खुद ‘सीतायन’ एवं ‘प्रियापुराण’ नामक दो किताबें भी लिखी है। वह अबतक समाजिक सरोकार से जुड़ी 32 किताबें लिख चुके हैं।
समाज को नजरिया बदलना होगा, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके
सौरभ जी ने राज्य की जनता से अपील की है कि जिस प्रकार अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जनता ने जंग लड़ी थी, सरकारी नियमों का पालन करते हुए वैसी ही जंग आज कोरोना के खिलाफ लड़ने होगी। कोरोना महामारी देश के लिए एक जंग के सामान ही है। इससे मुक्ति पाने के लिए सबको एक साथ मिलकर लड़ाई लड़नी होगी तभी महामारी का महाअंत होगा। इसके लिए ज्यादा कुछ नहीं करना है बस समाज को अपना नजरिया बदलना होगा ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
लॉकडाउन, मास्क लगाने, सैनेटाइजर के इस्तेमाल, फिजूल में घर से बाहर न निकलने जैसे नियमों शतप्रतिशत पालन करने से ही कोरोना को हर मोड़ पर हराया जा सकता है। अंग्रेजों से निजात पाने के लिए जिस प्रकार देशवासियों में एक जुनून था, उसी प्रकार से वर्तमान परिवेश में भी कोरोना को हराने के लिए एक-एक आदमी को अपने में बदलाव लाना होगा। कवि सौरभ कहते हैं कि जिंदगी रहेगी तो पैसे तो अर्जित कर लेंगे। कमाई घटी है तो आज हमें अपनी आवश्यकताओं को कम करते हुए अपना ही नहीं, दूसरों के जीवन को सुरक्षित बनाने की जरूरत है।
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