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तिरहुत नहर का पूर्वी तटबंध टूटा, पश्चिमी का 95% हिस्सा बहा; 50 हजार से अिधक आबादी प्रभावित

तिरहुत नहर का पूर्वी तटबंध टूटा, पश्चिमी का 95% हिस्सा बहा; 50 हजार से अिधक आबादी प्रभावित

बूढ़ी गंडक के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हाेने के बाद नदी का पानी उलटी दिशा में तिरहुत नहर में आ रहा था। इससे दाेनाें तटबंधाें पर दबाव बनने के कारण मुराैल प्रखंड के महमदपुर काेठी में तिरहुत नहर का पूर्वी बांध रविवार की अलस्सुबह टूट गया।
वहीं, शाम तक पश्चिमी तटबंध का 95 फीसदी हिस्सा नदी की तेज धार में बह गया। इससे लोगों में दहशत है। मुरौल, मुशहरी व मनियारी में बाढ़ का खतरा है। पश्चिमी बांध अगर टूट गया तो मुजफ्फरपुर शहर बाढ़ की चपेट में आ जाएगा। तिरहुत नहर का दायां तटबंध दाे जगह टूटने से बूढ़ी गंडक नदी का पानी मुराैल प्रखंड के पिलखी, धर्मागतपुर, जुड़ावनपट्टी, गंगटी से सकरा प्रखंड के सबहा हाेते हुए पूसा मार्ग के बगल से समस्तीपुर के चाैर की ओर जा रहा है। वैशाली के बरैला झील की तरफ पानी बढ़ रहा है।

एहतियातन मुजफ्फरपुर-पूसा मार्ग पर आवागमन रोक दिया गया है। पूर्वी बांध टूटने से प्रखंड के 30 से अधिक गांवाें में तेज रफ्तार से पानी प्रवाहित हाेने लगा। देखते ही देखते बाढ़ का पानी तेजी से पिलखी, मीरापुर, मुरौल सकरा की तरफ फैलने लगा। महमदपुर काेठी में तिरहुत नहर का बांध टूटने के बाद लगभग 50 हजार की आबादी प्रभावित हुई है। लोग जैसे-तैसे मवेशी, चारा के साथ तिरहुत नहर फेज-2 के बांध या फिर बूढ़ी गंडक नदी के बांध पर शरण ले रखे हैं। महमदपुर गोकुल गांव के 300 परिवार का घर पानी में बह गया है।
नहर के तटबंध को काटने व बचाने के लिए 10 गांवों के लोग भिड़े

मुजफ्फरपुर|बूढ़ी गंडक नदी से तिरहुत नहर में आए पानी की दिशा मोड़ने के लिए प्रशासनिक स्तर पर नहर के दाएं तटबंध को काटने के समर्थन और विरोध में मुशहरी व मुरौल प्रखंड के 10 गांवों के लोग रविवार को 11 बजे भिड़ गए। एक हजार से अधिक ग्रामीणों की भीड़ के बीच डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह व पुलिस की मौजूदगी में लाठी-डंडे से मारपीट होने लगी।

मधेपुरा: बाढ़ में फंसे हैं 50 हजार लोग

चौसा प्रखंड क्षेत्र की सात पंचायतें बाढ़ से पूरी तरह से प्रभावित हैं। जबकि तीन पंचायतें आंशिक रूप से प्रभावित हैं। इलाके में पिछले एक सप्ताह से प्रशासनिक पदाधिकारी, सांसद, विधायक और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का दौरा लगातार जारी है।

ये लोग प्रभावित लोगों से मिलकर उनकी परेशानी तो सुन रहे हैं पर पीड़ितों को अब तक प्रशासनिक और राजनीतिक आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिल पाया है। इससे बाढ़ में फंसे लोगों में अंदर ही अंदर आक्रोश पनप रहा है। कुछ लोग तीन फीट पानी के बीच अपने-अपने घरों के मचान पर शरण लिए हुए हैं, तो कुछ दूसरे जगहों पर प्लास्टिक टांग कर रहे हैं।

सीवान : खतरे के निशान से ऊपर बह रही सरयू

सरयू और दाहा नदी का रौद्र रूप जारी है। पिछले 24 घंटे में सरयू नदी का जलस्तर गंगपुर सिसवन में 35 सेंटीमीटर व दरौली में 19 सेंटीमीटर बढ़ा है। सैलाब के पानी में हो रहे उफान के चलते सरयू नदी गंगपुर सिसवन में रविवार की दोपहर 2:00 बजे खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। यहां नदी का जलस्तर 57.24 सेंटीमीटर रिकॉर्ड किया गया। 24 घंटे के दौरान यहां नदी के जलस्तर में 33 सेंटीमीटर का इजाफा हुआ है। वहीं दरौली में सरयू नदी खतरे के निशान से 31 सेंटीमीटर ऊपर है।

गोपालगंज: सड़कें कटीं, कई गांव टापू बने

दो दिनों में गंडक का जलस्तर 10 सेमी कम हुआ है। बावजूद नदी अभी खतरे के निशान से 28 सेमी ऊपर बह रही है। उधर बाल्मीकि नगर डैम से तीसरे दिन भी सकुन देने वाली खबर मिली है। रविवार को बराज से 1 लाख 92 हजार 200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे नदी के जलस्तर में नरमी बरकरार रहेगी। बाढ़ का पानी बैकुंठपुर में ज्यादा तबाही मचा रहा है। यहां 20 सड़के पानी की धार से कट गई है, नतीजतन 40 से ज्यादा गांव टापू बने हैं।



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Eastern embankment of Tirhut canal broken, 95% of western shed; More than 50 thousand population affected


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