लॉकडाउन के 154 दिनों में प्रदेश की 25 हजार बसों काे 15 अरब का घाटा, पटना में रोडवेज के 27 और प्राइवेट के 95 करोड़ रुपए भी डूबे
(आलोक द्विवेदी) प्रदेश में सरकारी और प्राइवेट लगभग 25 हजार बसों के पहिए पर पिछले 154 दिनों से ब्रेक लगा हुआ था। 25 अगस्त को प्रशासन की ओर मिली स्वीकृत के बाद फिर से बसों का संचलन शुरू हुआ। इस दौरान बिहार में बस मालिकाें काे लगभग 15 अरब रुपए का नुकसान हुआ। पटना में सरकारी बसों काे लगभग 27 करोड़ और प्राइवेट बसों काे 95 करोड़ का घाटा हो चुका है।
आय बंद होने के बाद भी बस के रख-रखाव पर परिवहन विभाग का लगभग 15 लाख और प्राइवेट बस मालिकाें के 2.30 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। वहीं पूरे बिहार की बात करें ताे यह आंकड़ा 13 कराेड़ रुपए से अधिक है। वहीं सरकारी और प्राइवेट बसों के कर्मचारियों के वेतन को जोड़ दिया जाए, तो यह रकम एक हजार करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है। पटना में ही 220 सरकारी बसें हर दिन संचालित होती हैं। इनमें 120 सिटी बसें हैं। शेष 100 अंतर जिला की बसें हैं। साथ ही 1600 प्राइवेट बसें भी हैं।
39 दिन बाद राजधानी में चलीं 85 सिटी बसें
पटना| करीब 39 दिन बाद सड़काें पर नगर सिटी बस और प्राइवेट बसें नजर अाईं। परिवहन निगम के मुताबिक मंगलवार को 85 बसें चलाई गईं। हर फेरे में सीट के अनुसार यात्री थे। बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा है। मास्क या गमछा से मुंह ढकें यात्रियों को ही बैठाने की अनुमति दी गई। सेनेटाइजर का भी इस्तेमाल किया गया। सिटी बस सेवा शुरू हाेने से राजधानी के साथ बिहटा, नौबतपुर, हाजीपुर, बख्तियारपुर सहित अन्य प्रखंडों में रहने वालाें काे सस्ता परिवहन उपलब्ध हाे गया।
प्राइवेट बस एवं ऑटो चालकों ने रोड टैक्स माफ करने के लिए लगाई गुहार
लॉकडाउन के दौरान बस, ऑटो, मेटाडोर संचालकों की आय पूरी तरह से बंद थी। इसकी वजह से कई ड्राइवर और खलासी सब्जी व फल बेचने लगे थे। जबकि, बस मालिक दूसरे काम में व्यस्त हो गए थे। लॉकडाउन खुलने के बाद फिर से स्थिति सामान्य होने में लगेगी। इसे देखते हुए प्राइवेट बस एवं ऑटो चालकों ने सरकार से रोड टैक्स माफी की मांग की है।
इस संबंध में बिहार मोटर ट्रासपोर्ट फेडरेशन के अध्यक्ष उदय शंकर प्रसाद सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से वाहनों से संबंधित विभिन्न टैक्स में छूट देने का सीधा लाभ सरकार को ही मिलेगा। लॉकडाउन के बाद फिर से सभी वाहन सड़कों पर दौड़ेगे, जिससे रोजगार बढ़ने के साथ राजस्व भी मिलेगा।
नई बसों की आपूर्ति में होगी अभी देरी
लॉकडाउन का असर परिवहन निगम के दूसरी योजनाओं पर भी पड़ा है। दिसंबर, 2019 में 200 बसों की खरीदारी की योजना बनाई गई थी। इसके साथ इलेक्ट्रिक एवं एसी बस के साथ सीएनजी बसों के खरीदारी के लिए जमीन स्तर पर काम चल रहा था। लेकिन, लॉकडाउन की वजह से बसों के निर्माण करने वाली कंपनियाें में काम बंद है। इसकी वजह से नई बसों की आपूर्ति में देरी होगी।
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