कोरोना काल में जीविका की बदली तकदीर, आत्मनिर्भर हो संभाल रहीं जिम्मेदारी
कोरोना महामारी ने जिले के कई जीविका दीदियों की तकदीर बदल दी है। लगभग दो दर्जन से अधिक दीदियों ने मास्क बनाकर अपनी आमदनी बढ़ाई है। जीविका दीदी में कई ऐसी महिलाएं हैं, जिनके पति कोरोना काल में या तो बाहर कमा रहे थे या बेरोजगारी के कारण घर पर थे। ऐसे दौर में जीविका दीदियों ने मास्क बनाकर न सिर्फ खुद को नई पहचान दी बल्कि परिवार के जीविकोपार्जन का भी माध्यम बनी। ग्रामीण क्षेत्रों में घर बैठे कम लागत में बेहतर कमाई ने स्वावलंबन की दिशा में एक नया कहानी लिखा है। अब ये जीविका दीदियां दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन रही हैं।
कोरोना काल में दिव्यांग पति का सहारा बनी सोनी
मुरलीगंज स्थित गोसाईं टोला के दिव्यांग संजय साह की पत्नी सोनी देवी कोरोना के शुरुआती दौर में काफी डरी-सहमी थी। परिवार के बीच रोजी- रोटी की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई थी। हिम्मत हारने के बजाए सोनी देवी ने जीविका समूह से जुड़कर पहले सिलाई मशीन के लिए कर्ज लिया, फिर सिलाई करने लगीं। सोनी देवी का कहना है कि बुरे वक्त में हुनर ही काम आता है। वह कहती हैं कि हिम्मत बुलंद है तो रास्ते स्वयं बन जाते हैं। आज सोनी मास्क बनाकर न केवल अच्छी आमदनी कर रही हैं, बल्कि आगे के भविष्य के प्रति भी काफी आशावान बन चुकी हैं।
पति का काम बंद होने पर मोनी ने ही चलाई घर-गृहस्थी
मुरलीगंज स्थित भतखोरा की माेनी देवी के पति कैटरिंग का काम करते थे। लॉकडाउन ने पूरी तरह से बेरोजगार कर दिया। घर में खाने-कमाने से जिंदगी की गाड़ी को आगे खींचने की समस्या थी। तीन बच्चों की मां पहले मीरगंज स्थित ताजमहल स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनी। मोनी देवी शुरू से ही आर्थिक समस्या से जूझ रही थीं। इस बीच कोरोना ने रही-सही कसर भी निकाल दी। लेकिन मोनी देवी ने हिम्मत हारने के बजाए जीविका से जुड़कर मास्क बनाने का कार्य शुरू किया और आज पहले से बेहतर स्थिति में है। लॉकडाउन के दौर में आठ हजार रुपए की कमाई की। वह कहती हैं कि आगे लिए कुछ प्लानिंग कर रही हैं ताकि। भविष्य और बेहतर किया जा सके।
कर्ज लेकर रुणा देवी ने शुरू किया मास्क बनाना
मुरलीगंज पासवान टोला की रुणा देवी ने कोरोना से पहले समूह से 200 रुपए राशन खरीदने के लिए कर्ज लिया था। दो-चार दिन काम चलने के बाद पुन: पहले वाली स्थिति हो गई। रुणा देवी को आगे कुछ समझ नहीं आ रहा था। समूह द्वारा जानकारी हासिल करने के बाद उन्होंने सिलाई-कटाई करने का निर्णय लिया और मास्क बनाने लगीं। दिन-रात कड़ी मेहनत के बाद रुणा न केवल अच्छी कमाई की, बल्कि अब घर-गृहस्थी को बेहतर ढंग से चला रही हैं। वह कहती हैं कि कोरोना के शुरुआती दौर में जब हर लोग परेशान थे, तब वह और उनका परिवार स्वाबलंबी बन रहा है।
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