साधना, सेवा और त्याग से ही मिलता है आत्मविश्वास : अवधूत
मधेपुरा व उसके आस-पास के इलाकों से लगभग पांच हजार से भी अधिक आनंद मार्गी अनुयायियों ने प्रथम संभागीय सेमिनार के दौरान घर बैठे सेमिनार का लाभ उठाए। साधकों के जीवन रक्षा को ध्यान में रखते हुए लाइव वेबकास्टिंग से तीन दिवसीय प्रथम संभागीय सेमिनार का आयोजन किया गया। शनिवार को सेमिनार के दूसरे दिन आनंद मार्ग प्रचारक संघ के सेमिनार के ट्रेनर आचार्य रुद्रानंद अवधूत ने साधकों को माइक्रोवाइटम यानी अणुजीवत अणुदेह और भूमादेह पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस (स्थूल नेगेटिव माइक्रोवाइटम) ने पृथ्वी ग्रह पर एक बड़ी आपदा पैदा की है। महामारी की इस अवस्था में, इस असहाय स्थिति में भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने जो मार्गदर्शन किया, उससे इस पर नियंत्रण संभव है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस एक ऋणात्मक (निगेटिव) माइक्रोवाइटा है, जिसकी कोई दवा नहीं बन पाई है। इस मामले में डॉक्टर केवल प्रयास में है। इस बीमारी से लड़ने के लिए पॉजिटिव (धनात्मक) माइक्रोवाइटा एकमात्र उपाय है।
प्रत्येक स्तरों पर पॉजिटिव माइक्रोवाइटा निर्मित करने के उपायों में शारीरिक और मानसिक स्तर पर स्वच्छता ही बचाव का श्रेष्ठकर उपाय है।
उन्होंने कहा कि दैहिक स्तर पर मूत्र त्याग के बाद जल का प्रयोग व पुरुषों के लिए लंगोटा पहनना आवश्यक है। एकादशी अमावस्या और पूर्णिमा के दिन निर्जला उपवास करें।
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