गार्ड को चाकू मार, ग्राहक को बंधक बना इंडियन बैंक से 69 लाख लूटकर फरार हो गए 8 लुटेरे
गुरुवार को फेस मास्क लगाए आठ लुटेरों ने इंडियन बैंक से 69 लाख् रुपए लूट लिये। घटना से पहले गार्ड पर चाकूओं से हमला किया। उसकी बंदूक को तोड़कर फेंक दिया। फिर ग्राहकों को एक कमरे बंद कर दिया। इसके बाद मैनेजर के कनपट्टी में पिस्टल सटाकर पहले केबीन और फिर चेस्ट से 69 लाख रुपए लूट लिये। फिर आराम से झोले व थैले में रुपए भरकर फरार हो गए।
घटना दाउदनगर थाना के औरंगाबाद-पटना हाईवे पर स्थित जिनोरिया इंडियन बैंक की है। घटना के 10 मिनट बाद किसी तरह ग्राहक बाहर निकले और फिर इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। जख्मी गार्ड को दाउदनगर इलाज के लिए ले जाया गया। सूचना पाकर मौके पर दाउदनगर एसडीपीओ राजकुमार तिवारी दल-बल के साथ पहुंचे और मामले की तहकीकात में जुट गए।
एक लुटेरे की पहचान हुई
एक बैंक लुटेरे की शिनाख्त पुलिस के एलबम से हुई है। लुटेरों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। बहुत जल्द लुटेरों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। -पंकज कुमार, एसपी, औरंगाबाद
अपराधी बोले- गन दो, नहीं तो मार देंगे
तीन बाइक पर आठ अपराधी जिनोरिया इंडियन बैंक में फेस मास्क लगाकर ग्राहकों के वेश में पहुंचे। सात अपराधियों की उम्र 20 से 30 साल थी। जबकि एक अपराधी 40 से 45 वर्ष का था। एक अपराधी बैंक के बाहर सड़क पर था। जबकि सात अपराधी अंदर थे। तीन अपराधी गार्ड के पास रुके। तीन अपराधी ग्राहकों के कतार में और एक अपराधी मैनेजर के चैंबर के पास। ईशारों में बात हुई। फिर क्या था। गार्ड के पास खड़े अपराधियों ने गन को पकड़ा लिया और बोले गन दो, वरना गोली मार देंगे। विरोध करने पर दो अपराधियों ने गन को छीनने लगे। एक ने ताबड़तोड़ उसे चाकू गोदने लगा। हाथ उंगली व सिर में छह बार वार किया।
मैनेजर की कनपट्टी पर सटाई पिस्टल
दूसरे अपराधी ने मैनेजर अनिमेश कुमार के पास पहुंचकर कनपट्टी पर पिस्टल सटा दी और बोला केबीन में ले चलो। इधर, दो अपराधियों ने ग्राहकों को बंधक बना लिए और एक कमरे में बंद कर बाहर से छिटकिनी लगा दी। फिर पांच अपराधी केबीन में पहुंच गए और कैशियर चंदन कुमार व फिल्ड ऑफिसर मुकेश कुमार के केबीन से आठ लाख रुपए लूटकर थैला में भर लिया। इसके बाद मैनेजर को चेस्ट ले गए। जहां से 61 लाख रुपए लूटकर थैला व गमछी में बांधकर आराम से रख लिए। फिर हथियार लहराते सभी अपराधी बाहर निकल गए। इसके बाद अपराधी बाइक से औरंगाबाद-पटना हाईवे के दाउदनगर की ओर निकल गए।
लुटेरों ने की थी बैंक लूटने की रेकी
जिस इंडियन बैंक में 69 लाख रुपए डकैती की घटना हुई है। वह पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है, लेकिन चौंकाने वाला विषय यह है कि उक्त बैंक में सीसीटीवी महीनों से बंद था और इमरजेंसी अलार्म भी खराब थी। लिहाजा अपराधी आराम से घटना को अंजाम दिए। आमतौर पर बैंक लूट में अपराधी सीसीटीवी को तोड़कर उसके हार्ड डिस्क अपने साथ ले जाते हैं, लेकिन यहां अपराधियों ने सीसीटीवी कैमरे के तरफ देखा भी नहीं।
घटना के अंदाज बताता है कि बैंक लुटेरे बैंक को रेकी किए थे। ग्राहक बनकर बैंक में कई दिन आए होंगे। बैंक के हर गतिविधि से वे वाकिफ होंगे। उन्हें यह भी मालूम था कि सीसीटीवी खराब है। इसे तोड़ने व साथ ले जाने का कोई मतलब नहीं। इसीलिए वे सीसीटीवी को नहीं तोड़े। 20 मिनट तक बैंक में तांडव मचाया और फिर आराम से फरार हो गए।
बड़ा सवाल: बैंक को पांच लाख रखने की क्षमता, फिर 69 लाख रुपए क्यों थे?
इंडियन बैंक को पांच लाख रुपए कैश रोजाना रखने की क्षमता है। फिर 69 लाख रुपए बैंक में महीनों से क्यों रखे गए थे? आखिर कैश को क्यों नहीं बाहर भेजा गया था? जब इतने पैसे बैंक में थे तो बैंक का सीसीटीवी कैमरा क्यों बंद था? इमरजेंसी अलार्म क्यों खराब थी? बैंक में पुलिस रोजाना जांच करती थी।
आखिर पुलिस की जांच में सीसीटीवी कैमरा व इमरजेंसी अलार्म को क्यों नहीं चेक किया गया? ज्यादा कैश की बातें क्यों नहीं सामने आयी? ऐसे कई सवाल हैं जो फिलहाल सिस्टम के सामने खड़े हो चुके हैं। जिसका जवाब बैंककर्मी को दे पाना मुश्किल है। पुलिस की जांच व अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद ही इससे पर्दा उठेगा।
चाकूओं के हमले से लगा मौत सामने नाच रही है
वक्त करीब 10:45 हो रहा था। मैं आम दिनों की तरह गेट के समीप चेयर पर बंदूक लेकर बैठा था। तभी अचानक आठ लोग फेस मास्क लगाए बैंक में प्रवेश किए। दो मिनट बाद तीन लोगों ने मुझ पर हमला कर दिया। बंदूक छीनने लगे। मैं विरोध किया तो हाथ पर ताबड़तोड़ चाकू से हमला करने लगे। चाकूओं के हमला से मेरे आंखों के सामने मौत नाचने लगा। मुझे लगा आज मेरा आखिरी दिन है। सबसे पहले दोनों हाथ की अंगुली, कलाई और फिर सिर में चाकूओं से गोदा। मुझे लगा अब मेरा ये आखिरी समय है। मैं लड़ूंगा।
लिहाजा मैं पांच मिनट तक उनलोगों के साथ गुथम-गुत्था की, लेकिन वे लोग कामयाब हो गए। मेरे बंदूक को छिन लिया और तोड़ दिया। फिर ग्राहकों को एक कमरे में बंद किया। फिर मैनेजर साहब को अपने कब्जे में लिया। पहले केबीन में और फिर चेस्ट में घुसे। अपराधी ताबड़-तोड़ रुपए की गड्डी थैले में डाल रहे थे। थैला भर गया तो नोटो की गड्डी गमछा में रखा। जब पूरे पैसे लूट लिए तो इसके बाद पिस्टल लहराते बैंक से बाहर निकल गए और मूझे छोड़ दिया। जैसा कि बैंक के जख्मी गार्ड चौरम गांव निवासी रिटायर्ड आर्मी जवान अनुग्रह नारायण सिंह ने बताया।
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