रूपसागर बीघा की पांच हजार की आबादी चचरी से होती है पार, नहीं देता है कोई ध्यान
आधा दर्जन गांव के लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर चचरी पुल के सहारे आवागमन करते हैं। प्रखंड स्थित वलिदाद पंचायत के रूप सागर विगहा अवस्थित मुख्य सोन नहर पर ग्रामीणों द्वारा निर्मित चचरी पुल आवागमन करने के लिए एकमात्र साधन है। पहले इस जगह पर नाव के सहारे ग्रामीण नहर पार कर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहुंचते थे। उसके बाद प्रखंड एवं जिला मुख्यालय से लेकर अन्य जगहों पर आते जाते थे। किंतु समय के अनुसार नाव का परिचालन बंद हो गया।
उसके बाद यहां के ग्रामीण अपने श्रमदान से बांस एवं बल्लो से मुख्य सोन नहर पर चचरी बांधकर आवागमन करने लगे। दलित महादलित आबादी वाले गांव की करुण गाथा 15 सालों से जारी है। यहां के लोग थोड़े से संसाधन में राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंचने के लिए बांस बल्लो के सहारे सुगम रास्ता बना लिया है। इस चचरी पुल के सहारे रूप सागर बीघा, कर्मचय बीघा, शंकर बीघा, इंजोर,शहवाजपुर धेवई, करण बीघा के लगभग 5000 के संख्या में लोग जान को जोखिम में डालकर आते जाते हैं।
इसी चचरी पुल के सहारे छोटे-छोटे बच्चे वलिदाद की प्राइवेट स्कूल में पढ़ने के लिए जाते हैं, फिलहाल लॉक डाउन की वजह से ऐसा नहीं हो रहा है। यहां के ग्रामीण मुख्य सोन नहर पर पुल बनाने के लिए जनप्रतिनिधि से लेकर आला अधिकारियों तक गुहार लगा चुके हैं यह सिलसिला 15 वर्षों से जारी है। फिर भी कोई अब तक ठोस पहल नहीं की जा सकी।
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