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गर्मी से हाेने वाली बीमारियां हुईं लाॅक पर गैस व डिप्रेशन के लाेग रहे शिकार

गर्मी से हाेने वाली बीमारियां हुईं लाॅक पर गैस व डिप्रेशन के लाेग रहे शिकार

काेराेनाकाल में बीमारियाें का भी ट्रेंड बदल गया है। पहले जहां इस समय लू, टायफायड, डायरिया, मलेरिया और डेंगू के मरीज सरकारी और निजी अस्पतालाें में आते थे, अब ऐसे मरीजाें की संख्या नहीं के बराबर है। इन दिनों तनाव, डिप्रेशन, गैस और मानसिक राेग के मरीज ज्यादा आरहे हैं। भास्कर ने शहर के प्रमुख डाॅक्टराें से बात की तो इसका खुलासा हुआ। हालांकि अब भी मरीज बहुत कम आपा रहे हैं। डाॅक्टराें से बातचीत में यह भी सामने आया कि करीब सवा दाे माह के लाॅकडाउन से पर्यावरण बेहतर हुआ। हवा शुद्ध हुई। पिछले साल की तुलना में गर्मी कम पड़ रही है। वाहन कम चलने से धूल कम हैं, इसलिए सांस की बीमारी से पीड़ित लाेग इलाज के लिए कम आरहे हैं। साथ ही गाड़ी कम चलने से दुर्घटनाग्रस्त मरीजाें की संख्या में भी कमी आई है। दूसरी तरफ, लाॅकडाउन से अार्थिक मंदी काे लेकर लाेग तनाव में आने के कारण डिप्रेशन के शिकार हाे रहे हैं। मानसिक रूप से बीमार हाे रहे हैं। साथ ही ज्यादातर समय घर पर रहने से गैस की चपेट में आ रहे हैं। तनाव से भी गैस व पेट की बीमारी के शिकार हाे रहे हैं।

टायफायड, डायरिया और डेंगू के मरीज पहले आने लगते थे
सीनियर फिजिशियन डाॅ. हेमशंकर शर्मा ने बताया, इस समय में तेज धूप में जाे बीमारियां लू से हाेती थी, वह नहीं हुई। गर्मी जैसे शुरू हुई बारिश हाेने लगी। ज्यादा गर्मी में मक्खियाें काे ठंडी जगह पसंद है। इससे इसकी संख्या बढ़ती है और डायरिया की वजह बनती है। ज्यादा गर्म हाेने पर डायरिया बढ़ता है, वह अभी नहीं है, इक्के-दुक्के मरीज ही ऐसे आते हैं। गैस्ट्राेएंट्राेलाॅजिस्ट डाॅ. राजीव सिन्हा ने बताया, पिछले वर्ष लू के मरीजाें के अलावा टायफायड, डायरिया, मलेरिया और डेंगू के इक्के-दुक्के मरीज आने लगे थे। इस बार गैस और तनाव के मरीज आरहे हैं। सर्दी-खांसी, बुखार के मरीजों की संख्या भी कम है। मुख्य रूप से गैस की शिकायत से पेट दर्द लेकर मरीज आते हैं।

सांस की बीमारी के मरीज कम डिप्रेशन के ज्यादा आ रहे केस
मानसिक राेग विशेषज्ञ डाॅ. कुमार गाैरव ने बताया, डिप्रेशन के मरीज ज्यादा आरहे हैं। 100 में 90 मरीज यही साेचकर परेशान हैं कि काेराेना से क्या हाेगा। लाेग आगे की जिंदगी कैसे जीएंगे। रात में नींद न आने और बेचैनी की शिकायत लेकर आते हैं। पिछले वर्ष गर्मी से इस तरह की शिकायत लेकर ज्यादा मरीज आते थे। मानसिक राेगियाें की परेशानी गर्मी में बढ़ती है। इसके अलावा मैट्रिक-इंटर के रिजल्ट के बाद कम अंक पाने वाले स्टूडेंट भी डिप्रेशन का शिकार हाेकर आते थे। इस बार ऐसा कम है। सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. पीबी मिश्रा ने बताया, सांस की बीमारियों के मरीज बहुत कम आ रहे हैं। आर्थाेपेडिक डाॅ. संजय निराला ने बताया, हड्डियाें के टूटने व ज्यादा गंभीर हाेने पर ही मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। जिन्हें ज्वाइंट पेन, गाठिया या आनुवांशिक नसाें की बीमारी है, वैसे मरीज जब असहनीय दर्द से परेशान हाे जाते हैं, तभी अाते हैं। अभी लाेग बहुत जरूरत पड़ने पर ही आ रहे हैं, इस माैसम में राेड एक्सीडेंट से घायल हाेकर ज्यादा आते थे।

दूर-दराज से मरीज आ रहे हैं कम जिन्हें ज्यादा जरूरी, वही आ रहे हैं
टीबी एवं चेस्ट स्पेशलिस्ट डाॅ. डीपी सिंह ने बताया, वृद्ध मरीज दाे माह से लाॅकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे थे। दिक्कत हाेने पर फाॅलाेअप के लिए वही आरहे हैं। बसाें से लाेग सफर करना नहीं चाहते और ट्रेन पूरी तरह चालू नहीं हुई है ताे दूर-दराज से मरीज नहीं आरहे हैं। जाे आभी रहे हैं, वह अपनी बाइक या बड़ी गाड़ी रिर्जव करके ही आते हैं। वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ. संदीप लाल ने बताया, मरीजाें की संख्या भी कम है, क्याेंकि पूरी तरह लाेग सवारी गाड़ियाें पर भराेसा नहीं कर पा रहे हैं। अत्यंत जरूरी होने पर ही मरीज आरहे हैं।
साेशल मीडिया से दूर रहिए और खूब करिये किताबाें से दाेस्ती
जेएलएनएमसीएच के मानसिक राेग विभाग के एचओडी डाॅ. अशाेक कुमार भगत बताते हैं कि साेशल मीडिया से दूर रहें। यह समय याेग-ध्यान काे दें। तनाव बढ़े ताे शवासन करें। जिन्हें संगीत पसंद है, उसे सुनिए, लगातार सुनेंगे ताे खाली समय बेहतर बीतेगा। किताबाें से दाेस्ती करें, धार्मिक ग्रंथाें काे जरूर पढ़ें और घराें में ही खुली हवा में थाेड़ी देर टहलिये। शरीर काे हाइड्रेंट रखने के लिए नींबू पानी पीते रहें। छाेटे बच्चाें काे अपने खानदान के बारे में बताएं, उसे पुराने किस्से सुनाएं और घर से बाहर निकलें ताे किसी की मदद जरूर करें।



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Diseases caused by heat are the victims of gas and depression on the lock


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