छह घंटे रुक-रुककर 16 एमएम हुई बारिश, तापमान में आई गिरावट
निसर्ग चक्रवाती तूफान को ले शुक्रवार सुबह से लेकर दोपहर के 3 बजे तक जिले में रुक-रुक कर बारिश हुई, इससे कई स्थानों व सड़कों पर जल-जमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सुबह के 9 बजे से शुरू हुई मूसलाधार बारिश अपराह्न के 3 बजे तक होती रही। मौसम विभाग ने 1. 3 एमएम बारिश की आशंका व्यक्त की थी। लेकिन करीब 16 मिमी बारिश होने के बात बताई जा रही है। लगातार हुई बारिश से तापमान में भी गिरावट आई। 12 बजे दिन में जिले 28 डिग्री तापमान मापी गई। जबकि एक दिन पूर्व अररिया का तापमान 38 डिग्री तक पहुंची थी।लगातार हुई बारिश से शहर के लगभग सभी सड़कें कीचड़मय हो गई है। इसके बाद हल्की बारिश हुई। बारिश होने के कारण लोगों को जरूरत की सामग्री के लिए छाता लेकर सड़क पर निकलना पड़ा। जबकि रिक्शा चालक व ठेला चालक बारिश में भींग कर अपने रोजमर्रा के कार्यों में व्यस्त रहे। मौसम में बदलाव को लेकर अधिकांश लोग अपने घरों में ही रहे।
विभिन्न स्थानों पर बारिश के बाद हुआ जलजमाव, परेशानी
बारिश होने से जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय परिसर, व्यवहार न्यायालय परिसर, हटिया रोड, चांदनी चौक, काली बाजार, आश्रम मोहल्ला, ओम नगर, शिवपुरी, आजाद नगर, शास्त्री नगर, खरैहिया बस्ती, इस्लाम नगर, भगत टोला, चित्रगुप्त नगर आदि स्थानों पर सड़क पर ही जलजमाव हो गया। जलजमाव होने के कारण कुछ लोगों के घर के आंगन में भी गंदा पानी का जमा हो गया। शहर में जलजमाव का प्रमुख कारण है नाले की पानी की निकासी नहीं होना। निकासी की व्यवस्था होती है तो जल-जमाव व कीचड़ से छुटकारा मिल सकता है।
मौसम वैज्ञानिक ने कहा अब लगातार होगी बारिश
कृषि विज्ञान केन्द्र के मौसम वैज्ञानिक प्रभात कुमार ने बताया कि अब लगातार बारिश होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि शनिवार को भी 25 .6 एमएम बारिश व 19 किलोमीटर प्रतिघंटा के रफ्तार से हवा बहने की संभावना है। लेकिन मॉनसून प्रवेश कर जाने के कारण किसी भी वक्त बारिश हो सकती है। लेकिन अब इस बारिश से किसानों को ज्यादा नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि खेत में लगे अधिकांश मकई व अन्य फसल की कटनी हो चुकी है। इस वक्त किसान के खेत में कोई दलहन व तिलहन फसल भी नहीं लगा है।
धान रोपने वाले किसानों के लिए यह वर्षा लाभदायक
कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीके मिश्रा ने बताया कि धान की फसल लगाने वाले किसानों के लिए यह बारिश लाभदायक है। अब बिचड़ा के बीज गिराने का समय आ गया है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष ज्यादा बारिश होने की संभावना है। इसलिए किसानों को ऊंचे खेत में बिचड़ा गिराने की आवश्यकता है। ताकि खेत में पानी नहीं लग पाए। नीचे स्तर की जमीन में बिचड़ा गिराने से बिचड़ा सड़ने का डर रहता है। इन्होंने बताया कि यह जिला नीचे है इसलिए किसानों को ऊंचे स्थान वाले खेत में ही बिचड़ा गिराना चाहिए।
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