आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में बस में बैठाने के दौरान मजदूरों से टिकट के नाम पर वसूले गए 850 रुपए
आंध्र प्रदेश के नेल्लोर से रविवार की रात 11:15 बजे मजदूरों को लेकर चली ट्रेन मंगलवार के अपराह्न 3:48 बजे बापूधाम रेलवे स्टेशन पहंुची। कुल 2322 किमी का सफर तय करने में करीब 40 घंटे लगे। ट्रेन के पहुंचने के पहले स्टेशन पर स्वास्थ्य विभाग की टीम के अलावा जिला प्रशासन के अधिकारी व पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। ट्रेन के आते प्लेटफार्म पर मौजूद लोगों ने उनका ताली बजा कर स्वागत किया।
इस ट्रेन में सूबे के 20 जिलों के 1168 मजदूर आए। इसमें पूर्वी चंपारण जिले के 163 शामिल थे। ट्रेन जैसे ही प्लेटफॉर्म पर पहुंची, वैसे ही वहां तैनात पुलिस बल ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए मजदूरों को एक-एक कर उतारा। सभी मजदूरों की दो बार थर्मल स्क्रीनिंग की गई। हालांकि स्क्रीनिंग के बाद कोई भी मजदूर संदिग्ध नहीं मिला। उसके बाद सभी को भोजन व पानी देकर जिला के प्रवासियों को संबंधित क्षेत्र के बस से क्वारेंटाइन सेंटर भेज दिया गया। इसके अलावे विभिन्न जिला के मजदूरों को खाना व पानी के साथ उनके जिला की निर्धारित बसों में बैठा कर रवाना कर दिया गया। इस दौरान डीएम शीर्षत कपिल अशोक, एसपी नवीन चंद्र झा, डीटीओ अनुराग कौशल सिंह, सदर एसडीओ प्रियरंजन राजू, सीएस रिजवान अहमद, एमवीआई पार्थ सारथी, नोडल पदाधिकारी अखिलेश पांडेय आदि अधिकारी मौजूद थे।
बस को कभी-कभार किया जारहा सेनेटाइज, डर रहे हैं ड्राइवर
श्रमिकों को उनके गृह जिला तक पहुंचाने वाली बस काे कभी-कभी सेनेटाइज किया जा रहा है। एक बस के ड्राइवर ने बताया कि ऐसे में उनके बीच संक्रमण का खतरा है। किसी प्रकार की सुरक्षात्मक किट भी उपलब्ध नहीं कराई गई है। ड्राइवर भी संक्रमण के खतरे से सशंकित हैं।
पांच ट्रेनों से अब तक आ चुके हैं एक हजार परदेसी मजदूर
यहां बता दे कि मोतिहारी में पहली ट्रेन राजस्थान के कोटा से यहां आई थी। जिसमें 650 छात्र आए थे। दूसरी ट्रेन बाड़मेर से आई जिसमें 115 श्रमिक, महाराष्ट्र के ठाणे से आई तीसरी ट्रेन में 185 श्रमिक, चौथी ट्रेन विशाखापट्टनम से आई थी, जिसमें ढाई सौ श्रमिक जिला में आए थे।
हमें यह बताया गया था कि टिकट का पैस नहीं लगेगा
बापूधाम स्टेशन पर उतरे पूर्णिया जिले के रुपौली प्रखंड के नवटोलिया निवासी अरविंद शर्मा ने बताया कि बस में बैठाने के दौरान ही कहा गया कि सभी पैसा निकाल कर रखें। वहां उतरने के पहले 850 रुपए देना होगा। जब कुछ लोगों ने इसका विरोध किया तो बस वालों ने उन्हें बस में बैठा कर स्टेशन लाने से इंकार कर दिया। मजबूरन उन्हें पैसा देना ही पड़ा। तब वे स्टेशन लाए। 40 घंटे की दूरी तय कर यहां पहुंचे। अन्य मजदूरों ने बताया कि सभी लोग डर से पैसा देकर टिकट लिए। जिनके पास पैसा नहीं था, वह अपने साथियों से उधार लेकर बस वालों से टिकट लिया। उनके सामने घर आने की मजबूरी थी। इसलिए टिकट लेना पड़ा। वहीं रविंद्र पासवान ने बताया कि उन लोगों को बताया गया था कि ट्रेन टिकट का पैसा नहीं लगेगा। लेकिन बस में बैठने के दौरान ही टिकट देने वाला कर्मी पैसा मांगने लगा। उसकी बात सुनकर वे लोग परेशान हो गए। उनके सामने कोई विकल्प नहीं था।
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