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चकबंदी पर सरकार का जोर, पर जिले में हाल यह कि 20 वर्षों से दफ्तर में नहीं बैठे काेई अफसर

चकबंदी पर सरकार का जोर, पर जिले में हाल यह कि 20 वर्षों से दफ्तर में नहीं बैठे काेई अफसर

एक तरफ राज्य सरकार का चकबंदी पर काफी जाेर है। जमीन की किस्म के आधार पर चकबंदी लागू करने की तैयारी चल रही है। दूसरी तरफ जिले के चकबंदी कार्यालय का हाल यह है कि दाेनाें प्रमुख अधिकारियाें के पद रिक्त हैं। उप निदेशक चकबंदी व प्रमंडलस्तरीय संयुक्त निदेशक चकबंदी दाेनाें ही पद 20 वर्षों से प्रभार में चल रहे हैं।
नतीजा यह है कि एक चैंबर में 20 वर्षाें से ताला लटका रहता है, ताे दाेनाें अधिकारियाें के संयुक्त काेर्ट में मार्च 2018 के बाद से किसी मामले की सुनवाई नहीं हुई है। राज्य में 1974 से 1998 तक जाेर-शाेर से भू-चकबंदी का कार्य चला। इसी दाैरान जिले में भी प्रखंडवार अंचल कार्यालयों में चकबंदी का अलग से कार्यालय खोलकर तत्कालीन 12 अंचलों में चकबंदी शुरू हुई।

सकरा, मुराैल, बंदरा अंचल में माॅडल के रूप में चकबंदी करते हुए अन्य अंचलों में करीब 50 प्रतिशत चकबंदी हाेने के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने इसे राेक दिया। उसके बाद मामला अदालत में चले जाने पर जिला समेत राज्य में चकबंदी कार्यालयों में सन्नाटा पसर गया।

इधर, राज्य सरकार ने एक बार फिर चकबंदी पर जाेर दिया। अब जमीन की किस्म के आधार पर चकबंदी लागू करने की तैयारी चल रही है। पर, बुधवार काे जब दैनिक भास्कर ने चकबंदी कार्यालयों की पड़ताल की ताे दोनों की स्थिति काफी बदतर दिखी।

बाेर्ड ताे लटका है, पर कमरे जर्जर और गोदाम जैसे हाल में कर्मचारी बैठने से भी डरते हैं

आयुक्त कार्यालय के प्रवेश द्वार से चंद कदम की दूरी पर स्थित संयुक्त निदेशक चकबंदी का चैंबर व कार्यालय जर्जर हाल में है। होमगार्ड कार्यालय के ऊपर बने संयुक्त निदेशक और उप निदेशक चकबंदी के कार्यालय में जाने पर किसी गोदाम में पहुंचने का आभास हाेता है। एक बड़े से हाल काे पटरे से घेरकर दाे हिस्साें में बांटा गया है।

आधा हिस्सा संयुक्त निदेशक चकबंदी का कार्यालय व चैंबर है। आधे हिस्से काे चदरे व पटरे से घेरकर उप निदेशक चकबंदी का कार्यालय, चैंबर व काेर्ट के रूप में बांटा गया है। स्थिति यह कि दाेनाें कार्यालयाें के कर्मचारी इन कमराें में बैठने से भी डरते हैं। कार्यालय में अंधेरा पसरा रहता है। कभी-कभी सांप भी निकल आता।

बुधवार काे एक बल्ब जल रहे जर्जर कमरे में एक कर्मचारी बैठे थे, ताे 3 बाहर धूप में। एक कर्मचारी ने बताया कि प्रधान सहायक अवकाश में हैं। संयुक्त निदेशक और उपनिदेशक चकबंदी के पद पर 20 वर्षों से अपर समाहर्ता राजस्व ही प्रभार में हैं। दाेनाें चैंबर में करीब 20 वर्षों से काेई अधिकारी नहीं बैठे हैं। संयुक्त न्यायालय में मार्च 2018 में तत्कालीन अपर समाहर्ता रंगनाथ चौधरी ने 4 मामलों की सुनवाई की थी। उसके बाद से काेई सुनवाई नहीं हुई।



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धूल से भरा चकबंदी संयुक्त निदेशक का कार्यालय और उसमें पड़ी टूटीं कुर्सियां।


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