स्कूल संचालकों ने कहा- कोरोना की आड़ में निजी स्कूल बंद कराना चाहती है सरकार
प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन जिला इकाई के द्वारा अपनी मांगों को लेकर बुधवार को समाहरणालय के समक्ष शांतिपूर्ण ढंग से सत्याग्रह किया गया। सत्याग्रह के उपरांत आठ सूत्री मांगों को लेकर डीएम को ज्ञापन भी सौंपा गया। सत्याग्रह में शामिल होने के लिए जिले के 19 प्रखंडों से काफी संख्या में निजी स्कूलों के संचालक जुटे थे। एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव डॉ एसपी वर्मा ने सभी उन्नीसो प्रखंड के निजी विद्यालय संचालकों को धैर्य एवं शांति पूर्वक सत्याग्रह करने हेतु साधुवाद दिया।
साथ ही राज्य सरकार को निजी विद्यालय संचालको, शिक्षकों, शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों के मौजूदा हालात के बारे में पुनः विचार करने हेतु आग्रह किया है। उन्होंने सरकार की दोहरी नीतियों पर बोलते हुए कहा कि कोरोना काल में सारी गतिविधियां चल रही है। चुनाव में हजारों-हजार की भीड़ में सभाएं हुई। पर्व त्योहार में बाजार भीड़ से भरी रही। बाजार भी बच्चों से भरे पड़े हुए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि कोरोना की आड़ में सरकार प्राइवेट स्कूलों को बंद कराना चाहती है।
विगत आठ माह से बंदी के कारण निजी स्कूलों की स्थिति दयनीय हो गई है। आरटीई (शिक्षा का अधिकार का कानून) जिसके तहत गरीब बच्चों का प्रत्येक प्राइवेट स्कूल के प्रथम वर्ग में 25 फीसद सीट आरक्षित है। इसके तहत गरीब बच्चों को पढ़ाने के बदले में सरकार प्रतिपूर्ति राशि देती है, लेकिन विगत 4 साल से प्रतिपूर्ति राशि भी बकाया चल रहा है। शिक्षक एवं कर्मी की हालत खराब है।
उठाई मांग- स्कूल खाेलने को लेकर गाइडलाइन जारी करे सरकार
डॉ एसपी वर्मा ने कहा कि शिक्षण संस्थानों को खोलने को लेकर केंद्र सरकार द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश के आलोक में राज्य सरकार के द्वारा ने अभी तक कोई भी गाइडलाइन पारित नहीं किया है। बिहार सरकार से आग्रह है कि जल्द से जल्द विद्यालयों को भौतिक रूप से संचालित करने की घोषणा की जाये। वेतन के अतिरिक्त हर विद्यालय के अन्य आवश्यक मासिक खर्चों में बिल्डिंग का लोन, किराया, बैंक के लोन की मासिक किस्त, मेंटेनेंस आधारित खर्चे, गाड़ियों की ईएमआई, बिजली का बिल के अलावा सभी व्यवसायिक टैक्स जिसमें कोई छूट नहीं दी गई है। इससे प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधक, शिक्षक एवं कर्मचारी अत्यंत मानसिक तनाव में हैं।
बिजली का बिल एवं ट्रांसपोर्ट में लगने वाले टैक्स को माफ करें
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रोहित वर्मा ने सरकार से मांग किया कि बिजली का बिल, ट्रांसपोर्ट में लगने वाले विभिन्न प्रकार के टैक्स को माफ किया जाए एवं बैंक के ईएमआई पर लगने वाले ब्याज को नहीं लिया जाए।
सरकार की ओर से कोई दिशानिर्देश न होने की वजह से अभिभावकों एवं विद्यालय के बीच तनाव उत्पन्न हो रहा हैं। मार्च महीने से किसी भी निजी विद्यालयों ने अभिभावकों से वाहन शुल्क नहीं लिया है परन्तु बिहार सरकार की तरफ से ट्रांसपोर्ट टैक्स, बिजली का बिल, इंश्योरेंस शुल्क निरंतर लिया जा रहा है। उक्त परिस्थिति देखते हुए सभी निजी विद्यालय संचालकों में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है।
आठ सूत्री मांगों को लेकर डीएम को सौंपा गया ज्ञापन
प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले निजी विद्यालय संचालकों ने निजी विद्यालयों के संरक्षण हेतु जिलाधिकारी को आठ सूत्री मांगो के लेकर ज्ञापन सौंपा। एसपी वर्मा ने कहा कि उक्त ज्ञापन सौपने से रोहतास जिला के सभी निजी विद्यालयों के संचालकों , शिक्षकों, शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों में आस जागृत हुई है एवं संगठन के इस मुहीम में उन्नीसों प्रखंड के निजी विद्यालय संचालकों ने एक साथ संघर्ष करने का निर्णय लिया है।
जिसका स्वागत एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने किया है। सत्याग्रह में रोहतास जिलाध्यक्ष रोहित वर्मा, जिला उपाध्यक्ष सुभाष कुमार कुशवाहा, ज़िला सचिव समरेंद्र कुमार, जिला सह सचिव संग्राम कांत, जिला महामंत्री अनिल कुमार शर्मा, सुनील कुमार, संजय त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष कुमार विकास प्रकाश, जिला संयोजक धनेन्द्र कुमार, जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी दुर्गेश पटेल, डिहरी प्रखंड अध्यक्ष अरविंद भारती, सचिव प्रशांत सिंह, कोषाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद , चेनारी प्रखंड अध्यक्ष दिनेश्वर तिवारी आदि शामिल रहे।
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