जिले के प्लस टू स्कूलों के 106 अतिथि शिक्षक बर्खास्त
जिले के प्लस टू स्कूलों में पदस्थापित 106 अतिथि शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षा के डीपीओ सुमन ने बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई माध्यमिक शिक्षा के निदेशक के आदेश पर हुई है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पत्रांक 659 दिनांक 18 नवम्बर के आलोक में डीपीओ माध्यमिक शिक्षा ने अपने पत्रांक 306 दिनांक 1 दिसम्बर के आदेश से बर्खास्त की है। जबकि इन शिक्षकों की बहाली अगस्त 2018 में हुई थी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने यह आदेश दिया है कि जिस अतिथि शिक्षकों का योगदान 5 अगस्त 2018 के बाद हुई है, उनकी सेवा समाप्त करनी है। जबकि जिले में 119 अतिथि शिक्षकों को जिले में 4 अगस्त 2018 को नियोजन पत्र मिला। इसमें एक सप्ताह का समय योगदान के लिए दिया गया था। इस तरह शिक्षकों ने छह अगस्त के बाद से ही स्कूलों में योगदान किया। यानि की विभागीय स्तर पर ही इन अतिथि शिक्षकों के नियोजन करने में लेट की गई। लेकिन विभागीय स्तर पर हुई गलती का खामियाजा इन अतिथि शिक्षकों को भुगतना पड़ा। इधर, 119 अतिथि शिक्षकों में 13 ने विभिन्न कारणों से पहले ही इस्तीफा दे दिया। लेकिन अभी 106 अतिथि शिक्षक कार्यरत है। लेकिन उन्हें भी हटा दिया गया। इस तरह वे पूरी तरह से बेरोजगार हो गए। इधर, शिक्षकों की सेवा बर्खास्त करने की वजह से जिले के 41 उच्च माध्यमिक स्कूलों में पठन- पाठन प्रभावित हो गया। वहां पर कई विषयों की पढ़ाई नहीं होगी और बच्चे बिना पढ़ाई के ही परीक्षा देने के लिए मजबूर होंगे। जबकि प्लस टू स्कूलों में बेहतर पठन- पाठन के लिए अतिथि शिक्षकों की बहाली हुई थी।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक के आदेश के आलोक में 5 अगस्त 2018 के बाद योगदान करने वाले शिक्षकों को हटाने की कार्रवाई की गई है। अगर शिक्षकों को किसी भी तरह की समस्या है तो उन्हें निदेशक से मिलकर अपनी बात रखनी चाहिए। विभागीय स्तर पर मिले आदेश का पालन किया गया है और आगे जो आदेश मिलेगा, उसके अनुसार कार्रवाई होगी।
सुमन, डीपीओ, माध्यमिक शिक्षा, सीवान
तत्कालीन अफसरों पर होनी चाहिए कार्रवाई: हटाए गए अतिथि शिक्षकों का कहना है कि इसमें उनकी किसी भी तरह की गलती नहीं है। विभागीय स्तर पर गलती हुई है। इसलिए विभागीय अफसर इसके लिए जिम्मेवार है। इस मामले में तत्कालीन विभागीय अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन तत्कालीन विभागीय अफसरों पर कार्रवाई की जगह शिक्षकों पर ही गाज गिरा दी गई। इस तरह ऐसे शिक्षकों के समक्ष भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। साथ ही उनके परिवार व बच्चों का पालन- पोषण भी मुश्किल हो जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि जब तक प्लस टू स्कूलों में बहाली नहीं हो जाती, जब तक अतिथि शिक्षकों को नहीं हटाया जाना चाहिए था। बहाली के दौरान ऐसे शिक्षक फिर से आवेदन देकर नियोजन के लिए प्रयास करते। इस तरह वे अभी से ही बेरोजगार नहीं होते।
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