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वरीय था इसीलिए प्रभारी वीसी बना था संजय चाैधरी पता कर लें : एलसी साहा

वरीय था इसीलिए प्रभारी वीसी बना था संजय चाैधरी पता कर लें : एलसी साहा

अपनी वरीयता और प्राेफेसर के पद काे लेकर उठे सवाल पर टीएमबीयू के प्रभारी वीसी डाॅ. संजय कुमार चाैधरी द्वारा पीआरओ के माध्यम से रखे गए पक्ष काे लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। विश्वविद्यालय के पीआरओ ने डाॅ. चाैधरी का पक्ष रखते हुए कहा था कि उनसे पहले प्राे. लीला चंद्र साहा काे जूनियर हाेने के बाद भी प्रभारी वीसी बनाया गया था।

अब इस पर प्राे. साहा ने कहा है कि वह वरीय थे, इसलिए वीसी का प्रभार मिला था। संजय चाैधरी काे शायद यह नहीं पता है। वह टीएमबीयू के रजिस्ट्रार से फाइल मंगाकर देख लें। उन्हें प्रभार देने से पहले राजभवन ने 10 वरीय प्राेफेसर और डीन का नाम टीएमबीयू से मांगा था। उन शिक्षकों की ज्वाइनिंग की तिथि, रिटायर हाेने की तिथि और जन्मतिथि भी मांगी थी। इसके बाद उन्हें वरीयता के आधार पर वीसी का प्रभार मिला था।

दूसरी तरफ डाॅ. चाैधरी के प्राेफेसर हाेने पर सवाल उठाने वाले टीएनबी काॅलेज के पूर्व एसओ अमरेन्द्र झा ने कहा है कि विवि के पीआरओ ने डाॅ. चाैधरी का पक्ष रखा है कि वह प्राेफेसर हैं, इसीलिए नियमित वीसी की नियुक्ति के लिए राजभवन ने उन्हें बुलाया था।

अगर डाॅ. चाैधरी प्राेफेसर हैं ताे पीआरओ उनके डाॅक्यूमेंट काे सार्वजनिक करें। अमरेन्द्र झा ने दावा किया है कि जेपीयू छपरा के सिंडिकेट ने डाॅ. चाैधरी काे प्राेफेसर के पद पर पदनामित किया था जिसके आदेश काे राजभवन ने निरस्त कर दिया था।

सिंडिकेट का आदेश निरस्त हाेने की अधिसूचना भी जेपीयू ने जारी की थी। अब ताे सवाल यह है कि वह प्राेफेसर नहीं हैं ताे जेपीयू में प्राचार्य कैसे बने। डाॅ. चाैधरी पर वित्तीय गड़बड़ी के लगे आराेपाें की जांच रिपाेर्ट राजभवन काे भी भेजी गई थी और अंतिम निर्णय के लिए रखी हुई है।



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