कल महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला रहकर करेंगी करवा चौथ का व्रत
इस वर्ष करवा चौथ चार नवंबर को है। कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह त्योहार है। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। मिट्टी का एक पात्र, जिसमें जल रखा जाता है, उसे करवा कहते हैं। चतुर्थी तिथि को होने के कारण इस व्रत को करवा चौथ कहा जाता है।
इस दिन भगवान गणेश, गौरी एवं चंद्रमा की पूजा होती है। चंद्रमा को आयु, सुख और शांति का कारक मानते हैं, इसलिए इसकी पूजा कर महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में सुख-शांति तथा पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। मान्यता है कि इस पर्व में मां पार्वती की पूजा करने से अखंड सौभाग्य का आशीष मिलता है।
इसमें भगवान कार्तिक एवं गणेश की भी पूजा हाेती है। सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला रहकर यह व्रत करती है। इस पर्व में महिलाएं पूर्ण शृंगार कर लाल या पीला वस्त्र धारण कर सकती है।
चंद्रोदय रात 8:16 बजे पर होगा
पंडित श्रीपति त्रिपाठी ने बताया कि करवा चाैथ के दिन सुबह उठकर स्नान आदि करें। व्रत का संकल्प लें। इसके बाद मंत्र- मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये कर्क चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये का जाप करे। घर के मंदिर की दीवार पर गेरू से फलक बनाएं और चावल को पीसकर उससे करवा का चित्र बनाएं।
इस रीति को करवा धरना कहा जाता है। इस साल करवा चौथ व्रत पर पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5:29 बजे से 6:48 बजे तक का रहेगा। इस दिन चंद्रोदय रात 8:16 बजे पर होगा। पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि का आरंभ 3 नवंबर की रात 01:03 से शुरू होकर चतुर्थी तिथि 4 नवंबर की रात 02:08 बजे तक रहेगी।
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