चुनावी शोर से रूबरू होना हो तो प. चंपारण आएं, कदम-कदम पर दिखेंगी प्रचार गाड़ियां
पश्चिम चंपारण...राज्य और देश की सीमा पर स्थित जिला। यहां की धरती पर प्रकृति के सारे रंग हैं। हरे भरे जंगल, पहाड़, नदी-नाले सब कुछ यहां दिखते हैं। कोरोना के कारण छाई शांति चुनावी शोरगुल में अब पूरी तरह से समाप्त है। बेतिया शहर को छोड़ दें तो यहां के हर विधानसभा क्षेत्र में सौ-दो सौ मीटर पर प्रचार करती गाड़ियां दिखतीं हैं।
लगभग हर कस्बे में प्रत्याशियों के चुनाव कार्यालय में लगे लाउडस्पीकरों से प्रत्याशियों की तारीफ में कसीदे पढ़े जा रहे हैं, वादों की भरमार है। कुछ वादे तो ऐसे जो हर चुनाव से पहले लोगों ने सुने हैं। युवा वोटर मुखर हैं। वोट मांगने वाले प्रत्याशियों से वे सवाल भी कर रहे हैं। जात-पात और आखिरी समय की गोलबंदी यहां नई बात नहीं है, लेकिन अबतक की स्थिति में यह साफ दिख रहा है कि अखाड़े में ताल ठोक रहे निर्दलीय बागियों की काट दलीय प्रत्याशियों के लिए मुश्किल दिख रही है।
कोई बड़ी बात नहीं कि कुछ अंतत: दलीय प्रत्याशियों पर भारी पड़ें। हाल के वर्षों में यहां विकास के कुछ काम हुए हैं, कुछ अधूरे हैं। छावनी क्षेत्र में बन रहा फ्लाईओवर धीमी रफ्तार का शिकार है। बगहा जाना अब उतना दुरुह नहीं रहा, जितना दो साल पहले था। पर, अब भी गली-नालियों की कमी की चर्चा लोग करते हैं। कोरोना के कारण वाल्मीकिनगर उजाड़ पड़ा है।
नेपाली नागरिकों की खरीदारी से जेब भरने वाले व्यवसायी उदास हैं। पर्यटकों की आमद थम गई है। पर, मतदाता ठीक उसी तरह जैसे दोन नहर कभी नदियों के ऊपर तो कभी नीचे से गुजरती है, गुलाटी मार रहे हैं। यानी, जो सामने पड़ा...उन्हें नमस्ते किया और आगे बढ़े। हां, बापू और कस्तूरबा की कर्मस्थली भितिहरवा की पावन मिट्टी को उन प्रत्याशियों की अब भी तलाश है जिनमें सच बोलने की कूबत हो।
दलीय उम्मीदवारों की राह में बाधा बने बागी
बेतिया: एनडीए से पूर्व मंत्री रेणु कुमारी बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं। निवर्तमान विधायक मदन मोहन तिवारी को कांग्रेस ने उतारा है। यूं तो यहां से 10 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन इन दोनों के बीच सीधी टक्कर होगी। भाजपा को अपने वोट बैंक का भरोसा है तो कांग्रेस प्रत्याशी पिछले कार्यकाल में किए काम और महागठबंधन के समीकरण के सहारे अपनी नैया पार उतारने की जुगत में हैं।
लौरिया: निवर्तमान विधायक गायक विनय बिहारी को भाजपा ने फिर टिकट दिया है, जबकि राजद ने शंभू तिवारी को उतारा है। दोनों की राह में सबसे बड़ी बाधा बागी हैं। विनय को तो घर से ही चुनौती मिल रही है। उनकी करीबी रिश्तेदार नीलम सिंह निर्दलीय उतर उनके वोट बैंक में सेंधमारी कर रहीं हैं। कभी आरजेडी के नेता रहे रणकौशल बसपा टिकट पर मैदान में आकर शंभू तिवारी के लिए मुसीबत बन गए हैं।
चनपटिया: इस विधान सभा क्षेत्र से भाजपा ने अपने सीटिंग एमएलए प्रकाश राय की जगह गुनौली पंचायत के चार बार मुखिया बने उमाकांत सिंह को मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस ने अभिषेक रंजन को टिकट दिया है। यहां से निर्दलीय प्रत्याशी त्रिपुरारी तिवारी जम कर प्रचार कर रहे हैं और मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं। वैसे यहां से कुल 13 प्रत्याशी चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं।
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