मनेर की फीकी मिठास बिगाड़ सकती है सियासत का जायका, यहां यादव वोटर ही तय करते हैं विधायक
(मो. सिकन्दर) मनेर के दरगाह शरीफ पर शांति है। यहां आने वालों के बीच अभी चुनावी चर्चा नहीं है। राजद के वर्तमान विधायक भाई वीरेंद्र की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। लेकिन, एनडीए की ओर से उम्मीदवार को लेकर कई दावेदार हैं। हालांकि इतना साफ है कि मुकाबला एक बार फिर राजद व एनडीए में ही है।
बिहटा की चमक-दमक से इतर मनेर पहुंचते ही लोगों के मन की टीस साफ दिखती है। चुनावी चर्चा छेड़ते ही लोग बिफर पड़ते हैं। सबसे बड़ा मुद्दा बिहटा के शहरी विकास में मनेर के पीछे छूटने का है। सत्येंद्र राय कहते हैं कि कोई मनेर पर ध्यान नहीं देता, जबकि विधानसभा सीट इस नाम से है। सरकार बिहटा आकर लौट जाती है, मनेर कोई झांकने भी नहीं आता।
आर्सेनिक युक्त पानी व बालू खनन है इलाके का सबसे बड़ा मसला
मनेर के लोगों की सबसे बड़ी मांग आर्सेनिक मुक्त पानी है। इस सीट की 12 पंचायतों के 30 गांवों में आर्सेनिक की समस्या सामने आई थी। इसके बाद शुद्ध पेयजल के लिए 121 वार्डों में पाइपलाइन से आपूर्ति का निर्णय लिया गया। ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाया जाना था। इन्हें 2017 में ही पूरा होना था, लेकिन पूरी नहीं हुई।
मनेर बाजार में बेरोजगारी के मुद्दे पर चंद्रशेखर कुमार कहते हैं कि बालू खनन को लेकर जिस प्रकार से राजनीति हुई, उसने करीब दो लाख लोगों का रोजगार छीना है। भ्रष्टाचार का बोलबाला है। हर तरफ कमीशनखोरी है। कमीशन न मिलने पर बालू से भरी नाव को पलट दिया जाता है।
इससे लाखों का नुकसान होता है। माधोपुर के अर्जुन कुमार कहते हैं कि रोजगार की बात करिए तो रिटायर लोगों को प्रतिनियुक्ति कर दी जाती है और युवाओं को रोजगार के अवसर मिल नहीं पा रहे हैं। लोगों में नाराजगी साफ दिखती है।
पर्यटन स्थल नहीं बन पाया हल्दी छपरा, सिक्स लेन रोड भी खटाई में
मोहनपुर के सुधीर कुमार कहते हैं कि हल्दी छपरा को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी। लेकिन, यह बस घोषणा बनकर ही रह गई। सिक्स लेन सड़क भी बनाने का प्रस्ताव मूर्त रूप नहीं ले पाया। बिहटा शहर बन गया और मनेर को भुला दिया गया है।
मनेर बाजार के सुदर्शन सिंह कहते हैं कि बिहटा की चकाचौंध में मनेर गुम होता चला गया है। सूफी सर्किट के निर्माण की रफ्तार को देखकर आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं। वर्तमान विधायक को लेकर लोग कहते हैं कि विपक्ष में रहकर कोई कितना काम कर सकता है।
मनेर सीट पर यादव वोटर ही विधायक तय करते हैं। हालांकि, कृष्णौत-मजरौट का अलग ही मामला है। क्षेत्र में 1.10 लाख यादव वोटर हैं। सवर्ण वोटर 65 हजार हैं। भूमिहार वोटर 25 हजार हैं। 30 हजार मुस्लिम और 32 हजार दलित वोट हैं। कोयरी व कुर्मी के 25 हजार वोट भी कई बार समीकरण पलट देते हैं।
अबतक 16 चुनाव, 15 में एक ही परिवार शामिल रहा, 9 में जीते
मनेर में 1952 से 2015 तक 16 बार चुनाव हो चुका है। 15 चुनाव ऐसा है जिसमें एक ही परिवार के सदस्य या तो जीते हैं या दूसरे नंबर पर रहे। केवल 1952 में पूर्व विधायक श्रीकांत निराला या उनका परिवार मैदान में नहीं था। 1952 में कांग्रेस के रामेश्वर प्र. शास्त्री विजयी रहे। निर्दलीय जगदेव सिंह को हराया। उसके बाद से लेकर अबतक निराला, पिता रामनगीना सिंह, मां राजमति देवी व नाना भगवान सिंह जीते या दूसरे नंबर पर रहे।
निराला राजद के टिकट पर 2005 के दोनों चुनाव जीते। जनता दल के टिकट पर 1995 में व कांग्रेस के टिकट पर 1990 में जीते 1985 में कांग्रेस के टिकट पर मां जीतीं। पिता 1980 व 1972 में एनसीओ के टिकट पर जीते। 1967 में निर्दलीय जीते। 2010 व 2015 में राजद के टिकट पर भाई वीरेंद्र जीते। इस सीट पर भाजपा ने अबतक जीत दर्ज नहीं की है।
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