डॉ. राजेंद्र प्रसाद को तो देशरत्न मिल गया, पर जीरादेई के हिस्से में आए केवल वादे
डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भले ही देशरत्न के खिताब से नवाजा गया है, पर उनके गांव जीरादेई को आश्वासनाें और घोषणाओं के अलावा कुछ नहीं मिला। यहां तक कि संरक्षित स्मारक घोषित उनका पैतृक आवास भी खंडहर में तब्दील हो रहा है। बावजूद इस ओर न तो कभी मंत्रियों ने ध्यान दिया और न ही इसको लेकर कोई पहल ही हुई। 2014 में प्रधानमंत्री ने गांवों को संवारने और ग्रामीणाें की तकदीर बदलने का आह्वान किया तो सांसद ओमप्रकाश यादव ने जीरादेई को आदर्श बनाने के लिए गोद जरूर लिया, पर गांव आज भी गोद में ही खेल रहा है। आज तक यहां के लोगों को न तो अच्छी सड़क मिली, न पीने का साफ पानी और न बेहतर इलाज का सपना ही साकार हो पाया। उनके बच्चे अब भी टूटे-फूटे स्कूल में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। गर्मी में जब लू चलती है तो लोगों को रास्ते से उड़ती का सामना करना पड़ता है और जब बारिश होती है तो वही धूल कीचड़ बनकर ग्रामीणों को अपना कदम बढ़ाने से रोक देती है। भले ही गांव के नाम पर ही विधानसभा क्षेत्र का नाम रखा गया है, पर लोगों की फरियाद कभी भी विधानसभा की चहारदीवारी तक नहीं पहुंची। चुनाव के समय नेता आते हैं, ग्रामीणों से बेहतर करने का वायदा करते हैं और फिर और पांच साल का इंतजार शुरू हो जाता है। डॉ राजेंद्र प्रसाद 1952 में राष्ट्रपति बने थे। तब से अबतक इस क्षेत्र से कई विधायक मंत्री बने पर यहां के लोगों को कभी भी इसका फायदा नहीं हुआ। भारतीय गणतंत्र के प्रथम राष्ट्रपति का गांव जीरादेई नाम से प्रसिद्ध जीरादेई विधानसभा क्षेत्र की जनता की सारी उम्मीदें दम तोड़ चुकी हैं।
सीएम ने कहा था-जीरादेई बनेगा पर्यटन स्थल
2010 में जीरादेई पहुंचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की थी कि जीरादेई पर्यटन स्थल बनेगा। यह सपना भी अधूरा रहा। पर्यटकों की सुविधा के लिए अतिथिशाला बनवाने, देशरत्न के पैतृक आवास को संग्रहालय बनवाने, पर्यटन विभाग के कार्यालय की पुनर्स्थापना और पीजी तक की पढ़ाई के लिए स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना करने की घोषणा धरी की धरी रह गई।
बसें बंद, टूरिस्ट सेंटर भी हटा
दूसरी ओर जीरादेई से पटना तक चलने वाली राज्य ट्रांसपोर्ट की देशरत्न एक्सप्रेस बसें 1990 से बंद हैं। यहां से टूरिस्ट सेंटर भी हटा दिया गया है। टूरिस्टों के ठहरने के लिए कोई अतिथिशाला भी नहीं है। डॉ राजेंद्र प्रसाद के पैतृक आवास तक पहुंचने वाली सड़क अबतक चौड़ी नहीं हुई। वर्ष 1952 में जो बिजली के खंभे लगे थे वह भी टूट गए हंै। जल निकासी की व्यवस्था तथा पानी व बिजली के लिए जनप्रतिनिधियों से कई बार टकराव की नौबत भी आ चुकी है।
पांच मंत्री भी इसी जिले से थे
गौरतलब है कि राज्य सरकार के पांच मंत्री इसी ज़िले से आते हैं। 1977 में विधानसभा गठन के समय से कांग्रेस के राजाराम चौधरी से लेकर जदयू के रमेश सिंह कुशवाहा तक लगभग दर्जनभर जनप्रतिनिधि चुने गए हैं। लेकिन इन 43 वर्षों में जीरादेई में कोई बदलाव नहीं आया। 1977 में विधानसभा गठन के समय से कांग्रेस के राजाराम चौधरी, राघव प्रसाद-जनता पार्टी सेक्युलर (चरण सिंह), डाॅ त्रिभुवन नारायण सिंह -कांग्रेस, मो शहाबुद्दीन-निर्दलीय, शिवशंकर यादव जनता दल, एजाजुल हक -राजद, श्याम बहादुर सिंह-जदयू,आशा देवी -भाजपा और जदयू से रमेश सिंह कुशवाहा यहां का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
राजेंद्र स्मारक... हर साल होता है कार्यक्रम
डॉ. राजेंद्र प्रसाद के घर के ठीक सामने उनका स्मारक बनाया गया है। गांव आनेवाले तमाम लोग यहां माल्यार्पण जरूर करते हैं। उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर आयोजित सभाओं में देश के कोने-कोन से लोग आते हैं।
अनशन स्थल... यहां छिपी हैं बापू की यादें
यह स्थान आवास का बरामद है। स्वराज की लड़ाई को लेकर यहां अन्य महापुरुषों के साथ महात्मा गांधी ने भी अनशन किया था। यहां पर एक चौकी बिछी है। इसी पर बापू बैठते थे। इसी जगह अंग्रेजों को भगाने की रणनीति बनती थी।
राजेंद्र उद्यान... कुछ करने की देता है सीख
घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर राजेंद्र उद्यान है। यहां कई तरह के पौधे और फूल लगे हैं। यहां आनेवाले लोग उनकी आदमकद प्रतिमा को नमन करते हैं और यहां बैठकर शांति और सुकून का अनुभव करते हैं।
राजेंद्र बाबू की पत्नी ने किया था औषधालय का शिलान्यास, अब खंडहर हो गया
जीरादेई में चल रहा राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय खंडहर में बदल चुका है। जानकारी के मुताबिक 16 पंचायतों के बीच बना यह एकमात्र स्वास्थ्य केंद्र अब किसी काम का नहीं है। मालूम हो कि राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय का शिलान्यास देशरत्न की धर्मपत्नी राजवंशी देवी ने वर्ष 1957 में किया था। उनकी यह सोच थी कि यहां के लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर दूसरी जगह नहीं जाना पड़े। पर, ऐसा नहीं हुआ। अस्पताल बना जरूर, लेकिन देखरेख के अभाव में टूट गया। अब लोग इलाज कराने कहीं और जाते हैं। गांव के लोगों की परेशानी तब और बढ़ जाती है बारिश होने पर हर तरफ जलजमाव हो जाता है। रास्ते कीचड़ में सन जाते हैं।
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