सदर अस्पताल में 29 की जगह मात्र 17 डॉक्टर विशेषज्ञों की भी कमी, इलाज को भटकते मरीज
सदर अस्पताल में योगदान देने के बाद सामान लाने पटना गई एक महिला डॉक्टर बीते 20 दिनों से गायब है। उनके खिलाफ लिखित शिकायत विभाग से की गई है।
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. निरंजन कुमार ने बताया कि पटना की रहने वाली डॉ. निर्मला कुमारी ने एक अक्टूबर को सदर अस्पताल में योगदान दिया था। जिसके बाद सामान लाने की बात कहकर वो पटना वापस गई। फिर चार अक्टूबर को पटना से ही उन्होंने 15 अक्टूबर तक के लिए मेडिकल लीव का आवेदन दे दिया। लेकिन मेडिकल लीव का टर्म बीत जाने के पांच दिन बाद भी उनका कोई अता-पता नहीं है। ऐसे में उनके खिलाफ लिखित शिकायत की गई है।
दूसरी ओर नवनियुक्त डॉक्टर निर्मला का नंबर उपलब्ध नहीं होने के कारण इस आरोप पर उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।
गौरतलब हो कि करीब 14 लाख की आबादी वाले मुंगेर में इलाज के लिए सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल सदर अस्पताल ही है। जो लंबे समय से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में बेड की संख्या 100 से बढ़ाकर 300 करते हुए चिकित्सक के लिए सृजित 20 पद को 29 कर दिया गया। परंतु सृजित पद के अनुरूप चिकित्सक की नियुक्ति अस्पताल में नहीं हुई है।
चिकित्सक के लिए सृजित 29 पद के विरूद्ध मात्र 17 चिकित्सक ही अस्पताल में कार्यरत हैं। वर्तमान में तीन महिला सहित कुल 17 चिकित्सक सदर अस्पताल में है। इसके साथ-साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी कमी है।
इमरजेंसी में चल रहा जनरल ओपीडी
इसके बाद सरकार की ओर से सदर अस्पताल को 04 नए डाक्टर मिले हैं। जिनमें डॉ. हरेन्द्र कुमार, डॉ. रूपेश कुमार, डॉ. निधि कुमारी और डॉ. निर्मला कुमारी शामिल हैं। जिसमें से डा. निर्मला कुमारी 01 अक्टूबर को योगदान करने के बाद से गायब हैं।
जबकि एक अन्य महिला चिकित्सक डॉ. निधि कुमारी 01 अक्टूबर को योगदान देने के बाद तीन दिन पूर्व ड्यूटी ज्वाइन की हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ही मार्निंग शिफ्ट में जीओपीडी संचालित किया जा रहा है। 08 से 02 बजे तक 02 चिकित्सक नियुक्त किए गए है।
दूर से आए मरीज बिना इलाज लौटे
मेदनीचौकी 70 वर्षीय पबिया देवी पति गणेश महतो ने बताया कि उसके पैर की हड्डी कुछ माह पूर्व टूट गई थी, हाल के दिन में काफी दर्द है। हड्डी के डाक्टर से दिखाने आए, लेकिन बताया गया कि हड्डी ओपीडी बंद है।
वहीं असरगंज करहरिया निवासी ममता देवी पति छोटू मसानी ने बताया कि दांत दर्द से कई दिन से परेशान है। अस्पताल पहुंचने पर बताया गया कि दंत ओपीडी नहीं खुल रहा है। 25 वर्षीय सोनू हड्डी रोग विशेषज्ञ डाक्टर को दिखाने पहुंचे थे परंतु अस्थि ओपीडी बंद रहने के कारण वह इलाज नहीं करा पाए।
विशेषज्ञ की कमी से मरीज परेशान
दंत रोग विशेषज्ञ, नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ, चर्म रोग विशेषज्ञ एवं सर्जन चिकित्सक एक भी नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण जनरल ओपीडी सेवा छह माह से अधिक समय से बंद है।
प्रसव वार्ड का भी हाल बेहाल है। 03 महिला चिकित्सक में से मात्र 01 महिला गायनोलॉजिस्ट सर्जन डा. निर्मला गुप्ता के भरोसे प्रसव वार्ड संचालित हो रहा है। ऐसे में 08 घंटा ड्यूटी करने के बाद भी जरूरत पड़ने पर गायनोलॉजिस्ट महिला सर्जन को सर्जरी करने के लिए ऑनकॉल बुलाया जाता है।
एक माह पूर्व सदर अस्पताल में 20 डॉक्टर थे, जिनमें से 05 का तबादला हो चुका है, जबकि 01 एमडी की पढ़ाई के लिए 02 साल की स्टडी लीव पर चले गए हैं।
विभाग को कराया गया है अवगत
सदर अस्पताल में 01 अक्टूबर को योगदान करने के बाद से महिला चिकित्सक डॉ. निर्मला कुमारी गायब हैं। इसकी लिखित जानकारी विभाग को दी गई है। डॉक्टर की कमी के बारे में बताया गया है-
डॉ. निरंजन कुमार, उपाधीक्षक
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