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वे सीटें जो माले के संघर्ष की जमीन थीं, राजद उसे छोड़ने के लिए नहीं था तैयार, सीटों की हिस्सेदारी के सवाल पर महागठबंधन से माले अलग

वे सीटें जो माले के संघर्ष की जमीन थीं, राजद उसे छोड़ने के लिए नहीं था तैयार, सीटों की हिस्सेदारी के सवाल पर महागठबंधन से माले अलग

भाकपा-माले की महागठबंधन से नाता जोड़ने की कोशिश सीटों की हिस्सेदारी के सवाल पर दरक गई। माले ने जिन 30 सीटों पर लड़ने का ऐलान किया उनमें 1990 और उसके बाद हुए चुनावों में पार्टी जोर-आजमाइश करती रही है। कई जीतती भी रही है। माले की बुधवार को घोषित सूची में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां वह जीती तो नहीं, लेकिन लड़ी जरूर है और इन सीटों को वह संघर्ष की जमीन मानती रही है।

यह सीटे माले को मिलने में बड़ी परेशानी यह रही कि अधिकांश पर उसका मुकाबला राजद से ही हुआ। चाहे इन्हें वह जीती या फिर हारी। लिहाजा राजद का भी दावा उन सीटों पर था। 2015 का चुनाव अपवाद था जब माले के तीन विधायक एनडीए के घटक भाजपा और लोजपा को हराकर विधानसभा पहुंचे। अपवाद, कटिहार जिले की बारसोई सीट भी है जहां माले का मुकाबला भाजपा से ही होता रहा है।

सहार में भी पार्टी कांग्रेस व भाजपा से ही कंटेस्ट करती रही है। लेकिन ओबरा में माले का मुकाबला अक्सर राजद से ही हुआ। सीटों के लेन-देन में दोनों में कोई झुकने को तैयार नहीं हुआ। नतीजा सामने है। तकरार पालीगंज जैसी कुछ सीट पर ज्यादा था जिस पर दोनों दलों में से कोई दावा छोड़ने को तैयार नहीं हुआ।

2019 के लोकसभा चुनाव में माले महागठबंधन का हिस्सा नहीं थी लेकिन राजद ने आरा लोकसभा क्षेत्र से उसके उम्मीदवार राजू यादव के खिलाफ प्रत्याशी नहीं दिया था। विधानसभा चुनाव की कुछ सीटों पर भी ऐसी संभावना को अभी सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता। खासकर दरौली, बलरामपुर जैसी माले की पारंपरिक सीटों पर।
पार्टी की ताकत उसका कैडर, सूबे में 1995 में पांच सीटें पर जीती थी
1990 से राज्य के चुनावी अखाड़े में कूदी माले का खाता 1995 में पहली बार खुला जब मैरवा, दरौली, संदेश, सहार और ओबरा से उसके उम्मीदवार जीते। तब माले ने 89 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। 2000 में माले 107 सीटों पर लड़ी और छह जीती। दोनों चुनाव संयुक्त बिहार में हुए थे।

झारखंड अलग होने के बाद फरवरी 2005 के चुनाव में 109 सीटों पर लड़ने वाली माले को मैरवा, बारसोई, पालीगंज, दरौली, संदेश व सहार की सीटें जीती पर अक्टूबर 2005 के चुनाव में 89 प्रत्याशी लड़े और 5 पर जीत मिली। 2015 में 98 सीटें लड़ने वाली माले को तरारी, बलरामपुर व दरौली में ही सफलता मिली। इस चुनाव में पार्टी का वोट शेयर 1.5% ही रहा। कम वोट शेयर के बावजूद पार्टी की ताकत उसका कैडर है।



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Those seats which were the ground for the struggle of the Male, the RJD was not ready to leave it, Male separated from the Grand Alliance on the question of seat sharing


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