काेराेना से जंग जीत कर हारे वीर बहादुर; बीपी, शुगर और फेफड़े के संक्रमण से मौत
प्रखंड के इनरवा थाना के खम्हिया निवासी शिक्षक वीर बहादुर प्रसाद की मौत पटना पीएमसीएच में इलाज के दौरान हो गई है। वे पंद्रह दिनों से पटना के विभिन्न अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे थे। इसके पहले वे कोरोना पॉजिटिव होकर पंद्रह दिन आइसोलेट भी रह चुके थे। जहां आइसोलेट रहने के बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। वीर बहादुर प्रखंड शिक्षक के रुप में राजकीय मध्य विद्यालय इनरवा में पदस्थापित थे। शिक्षक वीर बहादूर के भाई लालबहादुर प्रसाद तथा उनके पुत्र कुंदन कुमार, चंदन कुमार व रंजन कुमार ने बताया कि वीर बहादूर 16 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव हुए थे। जिसके बाद उन्हें बेतिया जीएमसीएच मे भर्ती कराया गया। 30 सितंबर को उनकी रिपोर्ट निगेटिव हो गई।
लेकिन डाॅक्टरों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए पटना रेफर कर दिया। जहां बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल स्पर्श मेरीटेज मिठापुर पटना मे भर्ती कराया गया। वहां भी स्थिति में सुधार नहीं हुई तो डाॅक्टरों ने रेफर कर दिया। फिर पीएमसीएच में उन्हें भर्ती कराया गया। परिजनों ने बताया कि पीएमसीएच में भर्ती होने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। बीपी, शुगर और फेफड़े के संक्रमण के कारण स्थिति नाजुक होती गई। इलाज के दौरान ही 14 सितंबर को पीएमसीएच में मौत हो गई।
प्राथमिक शिक्षक संघ ने किया शोक सभा का आयोजन
मंगलवार को प्राथमिक शिक्षक संघ के सचिव नर्वोदय ठाकुर के नेतृत्व में इनरवा में शोक सभा का आयोजन कर शिक्षक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। जिसमें आनंद कुमार, नंदकिशोर प्रसाद, सुमित कुमार, योगेन्द्र यादव,सत्येंद्र कुमार, प्रेम सागर शर्मा, मुस्लिम गद्दी, प्रेम कुमार, प्रेम प्रसाद कुशवाहा, रामजीत राम,रमेश गिरी, मनोज प्रसाद कुशवाहा आदि मौजूद रहे।
लाॅकडाउन की वजह से अधूरा रह गया बेटी की शादी का सपना
शिक्षक वीर बहादुर प्रसाद को तीन पुत्र तथा एक पुत्री है। वीर बहादुर ने अपनी पुत्री की शादी 6 अप्रैल 2020 को नेपाल के टिहुकी चरगांहा निवासी लालबाबू साह के पुत्र सुमन कुमार से तय की थी। लेकिन लॉकडाउन हो जाने की वजह से पुत्री की शादी पर ग्रहण लग गया और उनकी जीवन लीला समाप्त होने के साथ ही बेटी के हाथ पीले करने के सपने भी अधूरे रह गए।
मल्टी डिजीज के मरीज में लापरवाही के कारण बढ़ता जाता है इंफेक्शन
अनुमंडलीय अस्पताल के नोडल पदाधिकारी डाॅ. आई हक ने बताया कि कोविड-19 मरीज जिसमें मल्टी डिजीज है, उसमें नेगेटिव होने के बाद भी मल्टी आर्गन इंफेक्शन रहता है। मल्टी डिजीज वाले मरीज में पोस्ट कोविड एक्शन एवं परिजनों की लापरवाही तथा चिकित्सकों की अनुपलब्धता के कारण के कारण इंफेक्शन शरीर के सभी अंगों में बढ़ जाता है।
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