सफाई पर हर माह 19.66 लाख रुपए खर्च फिर भी पसरी है गंदगी
आस-पास के नगर निकायों से अधिक मजदूरी देने के बावजूद शहर में कूड़ा का सही ढंग से उठाव नहीं हो पा रहा हैं। यही कारण है कि शहर के मुख्य मार्ग पर भी कूड़ा यत्र- तत्र पसरा रहना आम हो गया है। लोगों का कहना है कि एनजीओ को काम देने के बावजूद शहर सफाई के मामले में काफी पीछे चल रहा है। जबकि एनजीओ को काम दिए ढाई माह से अधिक हो गया है। लोगों की शिकायत है कि मेन रोड पर भले ही थोड़ी बहुत सफाई दिख रही है, लेकिन गली-मोहल्ले में स्थिति बद से बदतर है। हालांकि कई लोगों की शिकायत है कि सफाईकर्मी पूरी ईमानदारी व गंभीरता से काम नहीं करते हैं। जिसके कारण सफाई काम प्रभावित हो रहा है।
70 हजार की आबादी वाले शहर की सफाई के लिए 150 सफाईकर्मी कार्यरत हैं। जिसमें 30 अस्थायी है। जिनका पेमेंट एनजीओ के द्वारा किया जा रहा है। सभी कर्मियों को 268 रुपए प्रतिदिन के हिसाब दिया जा रहा है। एनजीओ के प्रतिनिधि का कहना है कि मधेपुरा में आस-पास के नगर निकाय से ज्यादा मानदेय दिया जा रहा है। सहरसा में 236, सुपौल में 233 व मुरलीगंज में 225 रुपए प्रतिदिन दिया जाता है। वार्ड नंबर-दो की पार्षद डॉ. अभिलाषा कुमारी ने कहा कि इस बार शहर की सफाई का जिम्मा एनजीओ के हवाले है।
संसाधनों की कमी से जूझ रहा है नगर परिषद
नगर परिषद संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। स्थिति यह है कि मात्र चार ट्रैक्टर के सहारे शहर में कूड़ा का उठाव हो रहा है। वहीं न तो कूड़ा उठाव के लिए ट्रिपर और न ही बॉबकट है जो कूड़ा उठाव के साथ-साथ गली-मोहल्ले में कूड़ा काे एकत्रित कर पाए। पूर्व वार्ड पार्षद धीरेंद्र यादव बताते हैं कि पिछड़े वार्ड की स्थिति काफी खराब है। खासकर वार्ड 14 से 26 में कुछ वार्ड को छोड़ दिया जाए तो सफाई का काम भगवान भरोसे है। पूर्व पार्षद कहते हैं कि मैन पावर एनजीओ को बढ़ाना होगा। प्रति वार्ड के लिए कम से कम छह सफाईकर्मियों के अलावा जिम्मेदारी तय करनी होगी। वहीं नाला सफाई के लिए भी अलग से मशीन के अलाव दक्ष मजदूरों को रखना होगा। तभी शहर कम संसाधन में भी जलजमाव से मुक्त हो सकेगा।
दशहरा तक कुछ मशीनों की आपूर्ति हो सकती है
नगर परिषद में संसाधनों की कमी है। जिसकी आपूर्ति के लिए प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद है कि दशहरा तक कुछ मशीनों की आपूर्ति हो सकती है।
प्रवीण कुमार, ईओ, मधेपुरा
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://www.bhaskar.com/local/bihar/muzaffarpur/madhepura/news/1966-lakh-rupees-spent-every-month-on-cleanliness-yet-the-dirt-is-lying-127733644.html
https://i9.dainikbhaskar.com/thumbnails/680x588/web2images/www.bhaskar.com/2020/09/19/orig_1_1600531666.jpg
0 Response to "सफाई पर हर माह 19.66 लाख रुपए खर्च फिर भी पसरी है गंदगी"
Post a Comment