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साढ़े तीन करोड़ से जमला में बना सेग्रिगेशन प्लांट, मगर उद्घाटन के बाद ही हो गया बंद

साढ़े तीन करोड़ से जमला में बना सेग्रिगेशन प्लांट, मगर उद्घाटन के बाद ही हो गया बंद

नगर परिषद क्षेत्र के सभी 38 वार्डों के कचरा के निष्पादन के लिए जमला में तकरीबन साढ़े तीन करोड़ की लागत से तीन साल पहले सेग्रिगेशन प्लांट लगाया गया था। जिसमें गीले व सूखे कचरे से अलग-अलग खाद बनाने की योजना थी। इसके अलावा प्लास्टिक से तेल निकालने की भी योजना थी। लेकिन नगर परिषद की उदासीनता के कारण यह प्लांट चालू होने के साथ जो बंद हुआ, वह तीन साल बाद भी बंद हीं है। जिसके कारण अधिकांश उपकरण खराब हो गए है। इस अवधि में प्रोसेसिंग प्लांट में लगाए गए उपकरणों की गारंटी अवधि भी समाप्त हो गई है। जिसके कारण उपकरणों को बनवाने में अब दुबारा खर्च करना पड़ेगा।
प्लांट के बंद रहने के कारण पूरे नगर परिषद का कचरा एनएच के किनारे गिराया जा रहा है। जिसके कारण कई वार्ड के लोगों को काफी परेशानी हो रही है। नगर परिषद के तत्कालीन ईओ हरवीर गौतम ने इस सेग्रिगेशन प्लांट की रूप रेखा तैयार की थी। मोतिहारी में लगने वाला यह प्लांट नार्थ बिहार का पहला प्लांट था। लेकिन, नगर परिषद प्रशासन की उदासीनता के कारण महज एक इंसुलेटर के नही लगने के कारण यह प्लांट चालू नहीं हो सका। सूत्रों की माने तो नगर परिषद प्रशासन जानबूझकर मशीन की गारंटी व वारंटी को समाप्त होने दिया है ताकि बाद में यह दिखाया जा सके की प्लांट की अधिकांश मशीनें खराब हो गई है। सेग्रिगेशन प्लांट के नाम पर नगर परिषद के द्वारा भारी अनियमितता बरती गई है। प्लांट के टेंडर से लेकर मशीन की खरीदारी में व्यापक गड़बड़ी है। जिसकी अगर विभागीय जांच हो तो खुलासा हो सकता है। डोर टू डोर कलेक्शन के लिए नहीं मिला लोगों को डस्टबिन | नप प्रशासन को सभी घरों में दो-दो डस्टबिन देना था। ताकि एक में सूखा कचरा व दूसरे में गीला कचरा रखा जा सके। इसके बाद डोर टू डोर कलेक्शन करने वाले सफाई कर्मियों को गीला व सूखा कचरा के लिए अलग व्यवस्था करनी थी। प्लास्टिक का भी कलेक्शन अलग करना था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शहर में कचरा उठाने की जिम्मेदारी इंवाइरोन सॉल्यूशन को है।



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Segregation plant built in Jamla with three and a half million, but closed after inauguration


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