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प्रोफेसर नियुक्ति नियमावली का विवाद राजभवन पहुंचा

प्रोफेसर नियुक्ति नियमावली का विवाद राजभवन पहुंचा

राज्य के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति के लिए बनी नियमावली 2020 पर उठा विवाद राजभवन पहुंच गया है। नियमावली पर एमएलसी डॉ. संजीव कुमार सिंह ने सवाल उठाए थे और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि नियमावली का अध्ययन कराया जाए। इस पत्र का जिक्र करते हुए शिक्षा विभाग के विशेष सचिव ने विश्वविद्यालय सेवा आयोग को लिखा था कि जो आपत्तियां एमएलसी ने की हैं और नियमावली में जो बातें कही गई हैं उनकी समीक्षा कर रिपोर्ट दी जाए।

डॉ. सिंह ने बताया कि आयोग ने अपनी समीक्षा शिक्षा विभाग को भेज दी थी जिसे शिक्षा विभाग ने राजभवन को उपलब्ध करा दिया है एमएलसी ने आपत्ति की थी कि नियमावली में यूजीसी के पीएचडी रेगुलेशन 2009 को मान्य किया गया है जबकि राज्य के विश्वविद्यालयों में यह 2013 और 2014 से लागू हुआ था। डॉ. संजीव सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में आरोप लगाया था कि बिहार के अभ्यर्थियों को आवेदन की दौड़ से बाहर करने की साजिश की गई है।

राज्य के विश्वविद्यालयों में एमफिल कोर्स नहीं होने के बाद भी नियमावली में इस पर वेटेज दिया गया है। एकेडमिक रिकॉर्ड में स्नातक और स्नातकोत्तर का जिक्र किया गया है जबकि पहले इसमें मैट्रिक और इंटर भी शामिल था। कुछ दूसरे राज्यों के मैट्रिक और इंटर के बोर्ड बिहार में प्रतिबंधित हैं। ऐसे में बोर्ड से मैट्रिक और इंटर करने वालों की शैक्षणिक योग्यता केवल स्नातक और पीजी से मान्य नहीं हो सकती है। शोध पत्र प्रकाशन के लिए किए गए प्रावधान में हिंदी यूजीसी के रेफरीड जर्नल का जिक्र नहीं किया गया है।



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