इस युग में पहली बार लॉकडाउन में जन्मे कान्हा, पूरे बिहार में मनाई गई जन्माष्टमी
द्वापर में जैसे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, कमोबेश वैसी ही स्थिति इस युग में पहली बार सामने आई। कोरोना संक्रमण के खतराें के बीच लॉकडाउन के कारण मंदिरों में ताले लगे हुए हैं। हर बार की तरह मंदिरों में रोशनी नहीं, बल्कि अंधेरा पसरा रहा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय ही रोशनी हुई, पुजारी ने आरती की, भोग लगाया।
लेकिन भक्त इस मौके पर अपने आराध्य के दर्शन से वंचित ही रहे। मंगलवार को पूरे बिहार में जन्माष्टमी मनाई गई, लेकिन उत्सव सिर्फ लोग के मन तक सीमित रहा। पटना और बिहार के लगभग सभी मंदिरों में सुबह से देर रात जन्म के समय तक ताले रहे। रात 12 बजे भगवान कृष्ण के जन्म के समय हर साल भव्य उत्सव होता था, लेकिन, इस बार सिर्फ पुजारी ने आरती की और भोग लगाया।
पटना समेत सभी इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी आज
वैष्णव यानी साधु-संत बुधवार को जन्माष्टमी के साथ श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाएंगे। पटना के इस्कॉन मंदिर में भी बुधवार को ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सह जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस्कॉन पटना के अध्यक्ष श्रीकृष्ण कृपा दास ने बताया कि बुधवार को दिन के 12 बजे से जन्माष्टमी मनेगी, लेकिन श्रद्धालु इसमें वर्चुअल ही शामिल होंगे। हालांकि कई दूसरे राज्यों में भी बुधवार को जन्माष्टमी मानई जाएगी।
पटना के बिरला मंदिर के गेट पर बैनर लगाकर श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया कि वे घर पर ही पूजा करें। देर रात जन्म के समय जब भास्कर संवाददाता पहुंचे तो मंदिर प्रबंधन ने कहा कि सिर्फ पुजारी ही पूजा-आरती करेंगे। दूसरे को प्रवेश नहीं मिलेगा।
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