स्वराेजगार के लिए जीविका समूह से जुड़े 83 हजार प्रवासी श्रमिकों के परिवार
कोरोना संक्रमित दौरान राज्य में दूसरे प्रदेशों से लौटकर आए श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने और उनके परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का अभियान तेज हो गया है। मनरेगा और जीविका के जरिए ग्रामीण विकास विभाग ऐसे परिवारों को आजीविका का साधन उपलब्ध करा रहा है। अबतक लगभग 83000 प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को जीविका के स्वयं सहायता समूह से जोड़ा गया है। इससे परिवार की महिलाओं को ग्रामस्तर पर ही स्वरोजगार उपलब्ध हो सकेगा। इस बीच मनरेगा योजना में प्रवासी श्रमिकों के लिए 2 लाख 22 हजार 939 जॉब कार्ड बनाए गए हैं।
आजीविका के लिए इच्छुक परिवारों को जीविका के माध्यम से कर्ज भी उपलब्ध कराया जाएगा। फिलहाल 1,000 से अधिक प्रवासी श्रमिक के परिवार मास्क बनाने के कारोबार में जुटे हुए हैं। इसके अलावा प्रवासी श्रमिकों के परिवार से जुड़ी महिलाओं को अन्य जीविका दीदियों के साथ मनरेगा योजना से संचालित कार्यों में मजदूरों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन और सेनेटाइजेशन कराने के लिए मेट के रूप में तैनात किया जा रहा है। इन्हें अकुशल श्रमिक के समान पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है। इस समय 10671 जीविका दीदियां मनरेगा योजना में मेट के रूप में कार्यरत हैं। वहीं 20 अप्रैल से लेकर अब तक 9 करोड़ से अधिक मानव श्रम दिवस का सृजन हुआ है।
39 हजार परिवारों को दिए गए 2-2 हजार रुपए: जीविका के माध्यम से संचालित सतत जीविकोपार्जन योजना से जुड़े ग्रामीण क्षेत्र के 40 हजार अत्यंत गरीब परिवारों में से लगभग 39 हजार परिवारों को खाद्य सुरक्षा के लिए 2-2 हजार रुपए दिए गए हैं। इसके अलावा निर्धन परिवारों के लिए जीविका के माध्यम से 16 हजार ग्राम संगठनों को खाद्य सुरक्षा निधि और स्वास्थ्य सुरक्षा निधि उपलब्ध कराई गई है ।
रोजगार से वंचित लोगों को दी जा रही सहायता
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि कोरोना काल में बडी़ संख्या में रोजगार से वंचित लोगों को विभाग की योजनाओं के जरिए आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया गया है। प्रवासी श्रमिकों और जीविका दीदियों द्वारा मास्क का निर्माण सुरक्षात्मक उपाय के साथ-साथ रोजगार का साधन बन गया है। बड़ी तादाद में प्रवासी श्रमिकों के परिवारों को जीविका से जोड़कर उन्हें आर्थिक संबल प्रदान किया गया है।
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