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मुख्यमंत्री बोले- जनता को हर साल 6000 करोड़ से अधिक दी जा रही सब्सिडी

मुख्यमंत्री बोले- जनता को हर साल 6000 करोड़ से अधिक दी जा रही सब्सिडी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं फ्री में बिजली दे दीजिए। हम तो बिजली पर राज्य के उपभोक्ताओं को हर साल 6000 करोड़ रुपए से अधिक सब्सिडी दे रहे हैं। अब किसानों को बहुत कम बिजली बिल देना पड़ता है। सरकार 6.50 रुपए प्रति यूनिट बिजली खरीदती है। लेकिन, किसानों को सिंचाई कार्य के लिए प्रति यूनिट सिर्फ 65 पैसे खर्च करने पड़ते हैं।

किसानों को डीजल से सिंचाई करने पर अगर 100 रुपए खर्च करने पड़ते थे तो बिजली से सिंचाई करने पर उन्हें 5 रुपए से भी कम खर्च करना पड़ता है। हमलोगों का उद्देश्य है कि लोगों को बिजली का लाभ मिले, बिजली की दिक्कत किसी को न हो। उन्होंने 1341.31 करोड़ रुपए की योजनाओं का उद्घाटन, 3130.54 करोड़ रुपए की लागत से बदले गए जर्जर तारों का लोकार्पण और 383.52 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और कार्य आरंभ किया।
अब सौर ऊर्जा को दिया जाएगा बढ़ावा: मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार सौर ऊर्जा पर जोर दे रही है। सौर ऊर्जा ही अक्षय ऊर्जा है। इसके लिए अधिक से अधिक लोगों को प्रेरित किया जाए। सरकारी भवनों पर सोलर प्लेट लगाए जा रहे हैं। ऊपर बिजली-नीचे मछली योजना पर भी तेजी से कार्य चल रहा है। इससे न सिर्फ पर्यावरण का संरक्षण होगा बल्कि लोगों की आमदनी भी बढ़ेगी।

लखीसराय और भागलपुर में सौर ऊर्जा प्लांट लगेगा। कार्यक्रम को ऊर्जा सचिव संजीव हंस ने भी संबोधित किया। इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मंत्री प्रमोद कुमार, राणा रणधीर सिंह, विजय कुमार सिन्हा, नीरज कुमार, सांसद राजीव प्रताप रुडी व विजय मांझी भी जुड़े। वहीं मुख्यमंत्री आवास में मुख्य सचिव दीपक कुमार, प्रधान सचिव चंचल कुमार, योजना सचिव मनीष कुमार वर्मा, आईपीआरडी सचिव अनुपम कुमार और ओएसडी गोपाल सिंह उपस्थित थे।

घर-घर पहुंची बिजली, इसलिए सफल हुआ लॉकडाउन : माेदी
उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अगर घर-घर बिजली नहीं पहुंची होती तो कोरोना संकट के दौरान महीनों का लाॅकडाउन कभी सफल नहीं होता। लोग घरों में बंद रहने की बजाय सड़कों पर निकल आते। बिजली की वजह से ही लोग एसी, पंखा और टीवी चलाकर अपने-अपने घरों में इत्मीनान से रहे। उन्होंने कहा कि 2005 के पहले बिहार की हालत अफ्रीकी देशों की तरह थी।

शहरों में जेनरेटर का शोर, जर्जर लटकते तार, लो वोल्टेज और चारों तरफ घुप्प अंधेरा ही बिहार की पहचान थी। पिछले 15 वर्षा में हमने बिजली की स्थिति में सुधार के लिए 98856 करोड़ रुपए खर्च किए। घर-घर बिजली पहुंचाने के बाद सरकार किसानों को डीजल से खेती करने की मजबूरी से मुक्ति दिला रही है। अबतक 1 लाख 42 हजार किसानों को सिंचाई के लिए बिजली कनेक्शन दिया जा चुका है। डीजल से एक कट्ठे की सिंचाई में पहले जहां 20 रुपए खर्च होता था, वहीं बिजली से मात्र 82 पैसे लागत आती है।

2005 में 700 मेगावाट थी खपत, आज 5932 मेगावाट
ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में बिहार अंधकार युग से निकल कर एलईडी के युग में पहुंच गया है। 2005 से पहले बिहार में काफी कम क्षमता वाले 45 ग्रिड थे। आज उच्च क्षमता वाले 152 ग्रिड हैं। 2005 में बिहार में मुश्किल से 700 मेगावाट बिजली की खपत होती थी, आज 5932 मेगावाट बिजली की खपत होती है। बिहार के 86% लोग गांव में रहते हैं तो बिजली का अधिकतर हिस्सा भी गांव में ही पहुंचा है। इससे अंधकार का वातावरण हमेशा के लिए छंट गया।



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The Chief Minister said - more than 6000 crore subsidy being given to the public every year


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