28 काे हत्या, 2 अगस्त को फुटेज मिले; 22 दिन बाद पहुंची घटनास्थल, सबूत व रिकॉर्ड गायब, रात को तीन गिरफ्तार
11 ईईए ग्राम पंचायत के गांव 4 ईईए निवासी 32 वर्षीय नरेश जाट की हत्या 28 जुलाई की रात काे की गई। 29 जुलाई काे ही पुलिस ने शव का निरीक्षण किया ताे गंभीर चाेटाें के निशान साफ दिख रहे थे। इसके बावजूद हत्या का मुकदमा दर्ज करने के बजाय मर्ग दर्ज की गई। पाेस्टमार्टम रिपाेर्ट के लंबे इंतजार के बीच आराेपी पक्ष काे सबूत मिटाने का पूरा माैका मिल गया। चाराें तरफ से दबाव पड़ा ताे सदर पुलिस ने राताें रात नया परिवाद लिखवाकर हत्या का मुकदमा भी दर्ज कर लिया जबकि अमूमन सीआरपीसी की धारा 174 में दर्ज मर्ग काे ही जांच में सबूताें के साथ हत्या के मुकदमे में बदला जाता है। इतना ही नहीं हत्या के साफ-साफ दिख रहे इस मामले में पुलिस 22वें दिन घटनास्थल पर निरीक्षण काे पहुंची।
इतनी लंबी अवधि बिताने का रहस्य समझ से बाहर है। बुधवार काे कलेक्टर महावीर प्रसाद वर्मा के निर्देश पर सीएमएचअाे डाॅ. गिरधारीलाल मेहरड़ा और सदर एसएचओहनुमानाराम बिश्नाेई टीम सहित कालियां राेड स्थित आशा नशा मुक्ति केंद्र पर निरीक्षण कर सबूत जुटाने पहुंचे। केेंद्र के ताला लगा हुआ था और अंदर न ताे काेई कर्मचारी था,न मरीज था। सबूत भी गायब हाे चुके थे। आराेपी संचालक लवप्रीतसिंह वालिया के पिता काे माैके पर बुलाया गया। वे सेंटर की चाबी लेकर आए और दरवाजा खाेल दिया। पुलिस अाैर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने करीब तीन घंटे तक निरीक्षण किया। पुलिस के लिहाज से सबूत जाे मिलने थे वे सेंटर के डीवीआर सिस्टम में हत्या की घटना के बाद 2 अगस्त काे ही मिल चुके थे।
रजिस्ट्रेशन संबंधी दस्तावेज नहीं मिले : सीएमएचओ
कालियां राेड पर आशा नशा मुक्ति केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे सीएमएचओ डाॅ. गिरधारीलाल मेहरड़ा ने बताया कि सेंटर पर काेई महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं मिला। करीब-करीब सभी दस्तावेजाें काे गायब कर दिया गया है। हां इतनी जानकारी जरूर मिली है कि नशा मुक्ति केंद्र में काेई एमबीबीएस डाॅक्टर और नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति नहीं थी। आयुर्वेदाचार्य सप्ताह में एक बार या दाे सप्ताह में एक बार निरीक्षण काे आते थे। सेंटर कितने बेड का रजिस्टर्ड है, इस संबंध में काेई दस्तावेज माैके पर नहीं मिले हैं। सेंटर पर ताला लगा हुआ था। माैके पर कुछ दवाएं मिली हैं जाे बहुत सामान्य घटक की हैं। भर्ती मरीजाें तक का रिकार्ड गायब था। रिपाेर्ट बनाकर कलेक्टर काे भेजी जा रही है।
मामले में बुधवार काे राजनीतिकरण भी हुआ। मृतक नरेश जाट कांग्रेसी कार्यकर्ता था। लिहाजा उसके निवास की विधानसभा से निर्वाचित विधायक गुरमीतसिंह कुन्नर मृतक के परिजनाें व काफी कार्यकर्ताओके साथ एसपी कार्यालय पहुंचे। एसपी से मिलकर आने के बाद उनके तेवर बदल गए। बाद में उन्हाेंने इस मामले में पुलिस की लापरवाही काे मानने से इनकार कर दिया। उन्हाेंने जाेर देकर कहा कि पाेस्टमार्टम रिपाेर्ट में देरी के कारण मुकदमा भी देरी से दर्ज हुआ। लेकिन अन्य सभी सवालाें का भी संताेषजनक जवाब नहीं दिया। उलटा पुलिस का बचाव ही करते रहे और मीडिया के सवालाें के बाद एएसपी सहीराम बिश्नाेई के चैंबर में उनके साथ चले गए।
इधर...अिधकारी बदला, अब जवाहरनगर एसएचओ करेंगे जांच
एसपी राजन दुष्यंत ने बताया कि मामला गंभीर है। पीड़ित पक्ष ने जांच अधिकारी बदलने की मांग की थी। इसलिए इस मामले की जांच जवाहरनगर एसएचओ राजेश सिहाग काे दी गई है। सीओ सिटी इस्माइल खान, जवाहरनगर एसएचओ व सदर एसएच हनुमानाराम बिश्नाेई की टीम ने मुख्य आराेपी लवप्रीतसिंह वालिया, लुधियाना निवासी कमल शर्मा व एफ ब्लाॅक मस्जिद कालाेनी निवासी गिरीश उर्फ गाेल्डी काे बुधवार देर शाम गिरफ्तार कर लिया है। मामले में नामजद तथा अन्य शामिलआराेपियाें की तलाश काे टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। अन्य सभी आराेपियाें काे दाे दिन में गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आराेपियाें काे गुरुवार दाेपहर अदालत में पेशकर रिमांड पर लिया जाएगा।आराेपी व उसके साथियाें द्वारा वारदात में प्रयुक्त संसाधनाें की बरामदगी की जानी है।
नरेश जाखड़ हत्या कांड में भाजपा ने ज्ञापन सौंपा : इधर भाजपा जिला अध्यक्ष आत्माराम तरड़ एवं प्रदेश मंत्री विजेंद्र पुनिया के नेतृत्व में बुधवार काे नरेश कुमार जाखड़ हत्याकांड में एसपी काे ज्ञापन सौंपा गया। भाजपा शिष्टमंडल ने मांग रखी कि हत्याकांड के सभी आराेपियाें काे तत्काल गिरफ्तार किया जाए। जिले में चल रहे अवैध नशामुक्ति केंद्रों की जांच की जाए। शिष्ट मंडल में महामंत्री प्रदीप धेरड़, राज्य प्रतिनिधि जुगल डूमरा, जिला उपाध्यक्ष सतपाल कासनिया, जिला प्रवक्ता पवन शर्मा, पूर्व पार्षद मनीराम स्वामी, मंडल अध्यक्ष सुशील अरोड़ा, प्रवीण फुटेला, मृतक का भाई विकास कुमार व कार्यकर्ता माैजूद थे।
सवालों के घेरे में आई श्रीगंगानगर जिला पुलिस
.1. 28 जुलाई की रात काे हत्या हाे चुकी थी। रात काे ही मृतक के भाई विकास जाट ने अपने भाई के शरीर पर चाेटाें के निशान देखकर हत्या का शक जताया था। ड्यूटी अधिकारी ने भी चाेटें देखकर उच्चाधिकारियाें काे हत्या किए जाने का संदेह जताया। लेकिन मुकदमे की बजाय मर्ग दर्ज की गई। इसका क्या कारण रहा?
2. पाेस्टमार्टम के बाद परिजन शव घर ले गए। 2 अगस्त काे परिजन थाने पहुंचे। जांच अधिकारी हवलदार लीलाधर के साथ नशा मुक्ति केंद्र पहुंचे। सेंटर में काेई नहीं मिला। कैमराें की रिकाॅर्डिंग काे डिलीट कर दिया गया था। डीवीआर से डेटा रिकवर करवाया ताे सबूत सामने आ गए। फिर भी मुकदमे में देरी क्याें की?
3. मारपीट के सबूत मिलनेऔर माैत के लाइव फुटेज मिलने के बाद वारदात के आराेपी क्याें नहीं राउंडअप किए गए। 22 दिन तक किसका इंतजार किया जाता रहा और किसके इशारे पर पुलिस इस हत्या के संगीन मामले में देरी करती रही। देरी का कारण मुल्जिमाें काे भगाने में पुलिस की भी संदिग्ध भूमिका ताे नहीं?
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