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बूढ़ी गंडक के कटाव से रेलवे लाइन को बचाने के लिए बना बांध हो रहा कमजोर

बूढ़ी गंडक के कटाव से रेलवे लाइन को बचाने के लिए बना बांध हो रहा कमजोर

सूबे में कोसी और बूढ़ी गंडक ने रफ्तार पकड़ ली है। दोनों नदियां ज्यादातर जगहों पर तेजी से बढ़ रही हैं। नेपाल में कोसी की सभी सहायक नदियों का जलस्तर लगातार ऊपर भाग रहा है।

बूढ़ी गंडक के जलस्तर में लगातार वृद्धि से शहर समेत जूट मिल पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। समस्तीपुर-दरभंगा रेलवे लाइन को बचाने के लिए रेलवे द्वारा करीब 200 मीटर में बनाया गया प्रोटेक्शन बांध की मिट्‌टी धंस रही है। बांध व रेलवे लाइन को बचाने के लिए जेसीबी से मिट्‌टी भर कर बांध की उंचाई बढ़ाई जा रही है।
बूढ़ी गंडक नदी पर स्थित रेलवे के पुल नंबर एक के गाटर से पानी सटने लगा है। रेलवे व जिला प्रशासन रेलवे लाइन पर ही मिट्‌टी भरा बोरी डालकर बांध बनाने पर विचार कर रही है। ताकि इलाके को डूबने से बचाया जा सके। रेलवे गुमटी के पास से नदी के पानी के ओवर फ्लो करने की संभावना को देखते हुए रेलवे व जिला प्रशासन के अधिकारी सतर्क हैं। डीएम शशांक शुंभकर खुद स्थल निरीक्षण कर चुके हैं। हालांकि बांध व रेलवे लाइन बचाने में बाढ़ नियंत्रण विभाग की निष्क्रियता के कारण लोगों में आक्रोश व्याप्त है।

बांका : विलासी नदी का पुल टूटा, मुंगेर का संपर्क भंग, 4 लाख से अधिक की आबादी प्रभावित

बांका में बरसात में पुल के टूटने का सिलसिला लगातार जारी है। एक के बाद एक जिले के विभिन्न हिस्से में बना पुल धाराशाही हो रहा है, जिससे बांका सहित आसपास कि क्षेत्र टापू बनता जा रहा है। चांदन पुल के टूटने के बाद शंभूगंज-इंगलिश मोड़ मुख्य मार्ग पर रामपुर के समीप विलासी नदी में पुल का पाया धंस गया। जबकि गंगटी नदी में पुराने पुल को तोड़कर ध्वस्त करने से डॉयवर्सन के सहारे मुंगेर जिला से आवाजाही हो रहा था। लेकिन जिला प्रशासन ने इस पथ पर बड़ी वाहनों का परिचालन रोक दिया है।

गोपालगंज : सड़क डूबने से 400 गांवाें का संपर्क कटा, टेंट में रात गुजार रहे हैं 25000 परिवार

जिले की करीब 7 लाख आबादी बाढ़ की बंधक बनी है। मुख्य सड़कें व लिंक रोड डूबने से करीब 400 गांवों का संपर्क जिला व प्रखंड मुख्यालय से टूट गया है। सड़क संपर्क टूटने से चाह कर भी लोग रिश्तेदारों व परिजनों की सहायता नहीं कर पा रहे हैं। बाढ़ के कहर का आलम का यह है कि 25 सौ से ज्यादा परिवार विस्थापित होकर तटबंधों व सड़क के किनारे रातें गुजार रहे हैं। हर पल लोग बाढ़ का पानी नाप रहे है।

सासाराम : इंद्रपुरी बराज से छोड़ा 34295 क्यूसेक पानी- बुधवार को दोपहर तक इंद्रपुरी बाराज से 34295 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है।

अररिया: सुरसर नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद उफनाई खरहा धार, आधा दर्जन गांव में फैला पानी

नेपाल से आ रहे पानी और दो दिनों से हो रही बारिश के कारण नरपतगंज प्रखंड क्षेत्र स्थित खरहा धार फिर उफना गई है। नेपाल से निकलने वाली खरहा धार में उफान से भारत-नेपाल सीमा से सटा गांव मानिकपुर के अलावे अमरोरी, तोपनवाबगंज, लक्ष्मीपुर, मिर्जापुर, डुमरिया, मोतीटप्पू गांव के निचले इलाके में तेजी जल स्तर की बढ़ोतरी हो रही है। जबकि खेत खलिहान भी जलमग्न होने लगे हैं। लगातार जल स्तर में हो रही वृद्धि से कई गांव में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।



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Dam built to protect railway line from erosion of old Gandak


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