एनएमसीएच की नर्स काम पर लौटीं, अब पटना एम्स के 750 नर्सिंग स्टाफ बेमियादी हड़ताल पर
काेराेना संकट के बीच एकबार फिर एम्स में हड़ताल हाे गई है। इसबार कांट्रैक्ट पर बहाल करीब 750 नर्सिंग स्टाफ समान काम के लिए समान वेतन की मांग काे लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। गुरुवार की सुबह 7 बजे से ही इन लाेगाें ने काम ठप कर दिया। इसके बाद जमकर हंगामा, नारेबाजी करने के साथ ही एम्स के गेट काे जाम कर दिया। इनके हड़ताल पर जाने से काेराेना मरीजाें के इलाज सहित अन्य स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित रहीं। हालांकि एम्स प्रशासन का दावा है कि नर्सिंग छात्राओं और स्थायी नर्सिंग स्टाफ ने काम किया जिससे काेई खास असर नहीं पड़ा।
इधर, बुधवार रात एनएमसीएच में मरीजों के परिजनों के हंगामा करने के बाद कार्य बहिष्कार पर गईं नर्सें पर लौट आईं। एनएमसीएच के अधिक्षक ने उन्हें समझा-बुझा कर मामला शांत कराया।पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे एम्स के नर्सिंग स्टाफ काे काेराेना महामारी का हवाला देकर समझाने की काेशिश की लेकिन वे अपनी पांच सूत्री मांगाें पर अड़े रहे।
इस दाैरान पुलिस ने हल्का बल प्रयाेग भी किया। ये सभी बेदी एंड बेदी आउटसाेर्सिंग कंपनी के स्टाफ हैं। प्रदर्शन कर रहे नर्सिंग स्टाफ के प्रतिनिधियाें महिपाल, माेहित यादव, राजेश कुमार, देवबंदा, संजीव बलुकिया, स्नेल डुंगडुंग, प्रतिमा कुमारी, ज्याेति कुमारी, स्नेहा कुमारी आदि ने बताया कि एम्स प्रशासन से बातचीत हुई, पर बात नहीं बनी। इसके बाद हड़ताल पर चले गए।
कंपनी ने 10 स्टाफ काे नाैकरी से निकाला
महिपाल ने बताया कि कंपनी ने हड़ताल पर जाने के बाद गुरुवार की देर शाम फाेन कर 10 नर्सिंग स्टाफ काे नाैकरी से हटाने की बात कही है। जिन नर्सिंग स्टाफ काे फाेन कर काम पर नहीं अाने काे गया है, उनमें निशा पांडेय, बलबीर डूडी, देवेंद्र कुमार, माे. राजा, आशीष कुमार समेत 10 स्टाफ हैं। महिपाल ने कहा कि पटना एम्स में कांट्रैक्ट पर बहाल नर्सिंग स्टाफ काे 39 हजार रुपए मिलते हैं, जबकि रायपुर एम्स में 53 हजार और भुवनेश्वर एम्स में 45 हजार मिलते हैं।
रजिस्ट्रेशन हाे सकता है रद्द
इधर, निदेशक प्रमुख नर्सिंग, स्वास्थ्य सेवाएं, बिहार डाॅ. तापेश्वर प्रसाद ने एम्स निदेशक डाॅ. पीके सिंह से कहा है कि काेविड-19 महामारी कानून एवं आपातकालीन सेवा काे बाधित करने के कारण इन नर्सिंग स्टाफ का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। एम्स निदेशक डाॅ. प्रभात कुमार सिंह ने बताया कि निदेशक प्रमुख काे सूची भेज दी गई है। उनकी चार मांगें मान ली गई हैं। स्थायी करने और समान काम के लिए समान वेतन की मांग कैसे मानी जा सकती है?
ये हैं मांगें
- समान काम के लिए समान वेतन मिले। वेतनमान बढ़ाया जाए।
- स्थायी स्टाफ की तरह मेडिकल सुविधा व छुट्टी मिले।
- थर्ड पार्टी के अधीन से हटाकर एम्स खुद अपने अधीन करे।
- स्थायी बहाली हाे ताे प्राथमिकता मिले।
- काेई काम छाेड़े ताे एम्स के लेटरपैड पर अनुभव प्रमाणपत्र मिले।
अधीक्षक ने ली नर्सों की सुरक्षा और सम्मान की पूरी जिम्मेदारी
एनएमसीएच में कार्य बहिष्कार किये नर्स ने अस्पताल के अधीक्षक डाॅ. विनोद कुमार सिंह का भरोसा पा कर बुधवार को देर रात ही काम पर लौट आई। अधीक्षक ने बताया की नर्स को समझा बुझाकर और सुरक्षा और सम्मान की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए मामला शांत करा दिया गया हैं। इसके बाद वे लोग बुधवार की देर रात काम पर लौट आई हैं।
मालूम हो कि बुधवार की रात बाढ़ से पहुंचे मरीज के परिजनों ने नर्स की ओर से मरीज के परिजनों को मास्क लगाकर अंदर आने की हिदायत देने पर ड्यूटी पर तैनात नर्स से दुर्व्यवहार किया था। इसी से आक्रोशित नर्स ने कार्य बहिष्कार कर दिया था।
स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद संविदा कर्मियों की हड़ताल स्थगित
अपनी मांगों को लेकर दो दिनों से हड़ताल कर रहे स्वास्थ्य संविदा कर्मियों ने मंत्री मंगल पांडेय के आश्वासन के बाद हड़ताल स्थगित कर दिया। बिहार राज्य स्वास्थ्य संविदा कर्मी संघ के सचिव ललन कुमार सिंह ने बताया कि मंत्री ने मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है, जिसमें हर वर्ष 15 फीसदी की वेतन बढ़ोतरी और पब्लिक हेल्थ मैनेजमेंट कैडर बनाने आदि शामिल हैं।
कर्मचारियों की मांगों पर विचार के लिए बनेगी समिति: मंगल पांडेय
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की मांग पर विचार करने के लिए जल्द ही एक समिति गठित की जाएगी। समिति इनकी मांगों पर विचार कर सरकार को रिपोर्ट देगी। विभाग उस रिपोर्ट पर तर्कसंगत निर्णय लेगा।
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