3 की सुबह 8.28 के बाद बहनें अपने भाइयों की कलाई पर बांधेगी राखियां
सावन माह के अंतिम सोमवार 3 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। सुबह 08.28 बजे तक भद्रा रहेगी। इसके बाद से बहनें सुविधानुसार श्रेष्ठ मुहूर्त में भाइयों की कलाइयों पर राखी बांध सकेंगी। इस बार रक्षाबंधन का त्यौहार सावन के पांचवे व अंतिम सोमवार और स्नानदान पूर्णिमा व्रत के दिन आ रहा है।
इसी दिन सोमवार को रक्षाबंधन का संयोग देश के लिए शुभ माना गया है। भद्रा सूर्य की पुत्री है, जो इस बार रक्षाबंधन के दिन सुबह 08.28 बजे तक रहेगी। सोमवार को रक्षाबंधन के दिन सुबह 7.33 बजे तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र है। पंडित श्रीपति त्रिपाठी ने बताया कि इस बार पर्व पर कई शुभ संयोग भी बने हैं। सावन माह का आखिरी सोमवार, श्रावण पूर्णिमा, श्रावणी नक्षत्र और सर्वार्थसिद्धि का विशेष संयोग बन रहा है। यह दिन नामकरण, अन्न प्राशन, यात्रा, व्यापार, वाहन क्रय के लिए अच्छा है।
रक्षा सूत्र बांधते समय भाई को पूर्व दिशा की ओर बैठाएं
रक्षाबंधन के दिन सुबह-सुबह उठकर स्नान करें और शुद्ध कपड़े पहनें। इसके बाद घर को साफ करें। चावल, कच्चे सूत का कपड़ा, सरसों, रोली को एकसाथ मिलाएं। फिर पूजा की थाली तैयार कर दीप जलाएं। थाली में मिठाई रखें। इसके बाद भाई को पीढ़े पर बिठाएं। अगर पीढ़ा आम की लकड़ी का बना हो तो सर्वश्रेष्ठ है। रक्षा सूत्र बांधते वक्त भाई को पूर्व दिशा की ओर बिठाएं। भाई को तिलक लगाते समय बहन का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। इसके बाद भाई के माथे पर टीका लगाकर दाहिने हाथ पर रक्षा सूत्र बांधें। राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें। उसको मिठाई खिलाएं।
यह दिन नामकरण, अन्न प्राशन, यात्रा, व्यापार, वाहन क्रय के लिए अच्छा
इस दिन सुबह 9 से 10.30 बजे तक शुभ, दोपहर 1.30 से 3 बजे तक चर, दोपहर 3 से 4.30 बजे तक लाभ, शाम 4.30 से 6 बजे तक अमृत एवं शाम 6 से 7.30 बजे तक चर का चौघड़िया रहेगा। सोमवार के दिन रक्षाबंधन होने से अन्न एवं धनधान्य के लिए अच्छे अवसर रहेंगे। पूर्णिमा मुहूर्त 2020 पूर्णिमा तिथि आरंभ-रात्रि 08:36 (2 अगस्त), पूर्णिमा तिथि समाप्त-रात्रि 08:29 (3 अगस्त), बहनें इस विधि से भाई की कलाई में बांधें राखी।
रक्षाबंधन पर्व का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथा में राजसूय यज्ञ के समय भगवान कृष्ण को द्रौपदी ने रक्षा सूत्र के रूप में अपने आंचल का टुकड़ा बांधा था। इसी के बाद से बहनों द्वारा भाई को राखी बांधने की परंपरा शुरू हो गई। रक्षाबंधन के दिन ब्राह्मणों द्वारा अपने यजमानों को राखी बांधकर उनकी मंगलकामना की जाती है।
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