चांद के स्वास्थ्यकर्मी के पिता की कोरोना से एनएमसीएच में मौत, 10 नए पॉजिटिव मिले
कोरोना पॉज़िटिव पीएचसी चांद के एक स्वास्थ्यकर्मी पिता की सोमवार देर शाम इलाज के दौरान एनएमसीएच पटना में मौत हो गई। स्वास्थ्य कर्मी पिता की सैंपल जांच में रिपोर्ट बीते 18जुलाई को पॉज़िटिव आई थी, इस बीच उन्हें सदर अस्पताल से 19 जुलाई को एंबुलेंस के जरिये पटना रेफर किया गया था। जिनकी सोमवार देर शाम इलाज़ के दौरान एनएमसीएच पटना में मौत हो गई। कोरोना पॉज़िटिव मरीज की मौत की पुष्टि सिविल सर्जन डॉ. अरुण कुमार तिवारी ने की है।
इधर, मंगलवार को सदर अस्पताल के ट्रू नेट मशीन से 4 व एंटीजन किट से जांच में 4 समेत कुल 10 कोरोना पॉज़िटिव मरीज मिले हैं।स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इस तरह से जिले में अब तक कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 332 हो गई है। इस बीच आइसोलेशन सेंटर से इलाज़ के बाद250 कोरोना पॉज़िटिव मरीज डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। हालाकि उन्हें स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों ने होम आइसोलेशन में रहने की नसीहत दी है। सदर अस्पताल के एक डाटा ऑपरेटर की पटना के एम्स में सोमवार सुबह मौत हो गई। उसकी उम्र लगभग 35की थी।
इधर, सोमवार देर शाम में इलाज़ के दौरान पीएचसी चाँद के एक स्वास्थ्य कर्मी के पिता ने पटना स्थित एनएमसीएच में इलाज़ के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह से जिले में अब 6 कोरोना पॉज़िटिवों की मौत हो गई। असल में जिले में कोरोना पॉज़िटिव मरीजों की मौत का सिलसिला 3जुलाई से शुरू हुआ। 3 जुलाई को कोरोना पॉज़िटिव भभुआ शहर के एक वार्ड की रहने वाली करीब 50वर्षीया महिला थी। जिसकी 3 जुलाई को इलाज़ के दौरान गया मेडिकल कालेज में मौत हो गई थी। दूसरी मौत एक वृद्ध, अधेड़ और फिर एक अधेड़ के बाद सोमवार को पटना के एम्स में इलाज़ के दौरान सदर अस्पताल के एक डाटा ऑपरेटर की मौत हो चुकी है।
नियम का पालन नहीं हुआ तो भुगतने पड़ सकते हैं खतरनाक अंजाम
वैश्विक कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए ढाई माह तक देश में संपूर्ण लॉक लगाया गया था। लोगों ने इसका ध्यान पूर्वक पालन भी किया, लेकिन बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को देखते हुये एक बार फिर से सरकार ने लॉक डाउन लगा दिया है। हालाकि लॉक डाउन के बीच जिला प्रशासन ने बाजार में निकलने से पहले कुछ नियमों का पालन करने की हिदायत दी है। मास्क पहने व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को कहा गया है। इसके बावजूद लोग बिना मास्क के बाजार में घूमना मुसीबत बन सकता है। नियमों का पालन नहीं करना संक्रमण को फैलने का न्योता देना साबित होगा।
पुलिस का फोकस सिर्फ वाहन चेकिंग पर
लॉक डाउन के दौरान जिलेवासी तो अपनी जिम्मेदारी बिल्कुल नहीं समझ नहीं रहे हैं, पुलिस भी सुस्त पड़ी हुई है। सोशल डिस्टेंस बनाने के लिए न तो सख्ती दिखा रही है और न ही सघन पेट्रोलिंग। पुलिस सोशल डिस्टेंस बनाने का नाम पर सिर्फ वाहनों की जांच तक ही सिमटी है। हर दिन किसी न किसी सड़कों पर वाहनों की जांच होती है लेकिन बाकी जगह कोई पूछने वाला भी नहीं है। बाजार में एक-एक छोटी दुकान में 10 से 15 लोग घुसकर खरीदारी कर रहे हैं लेकिन उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।
कोरोना वायरस के पांव गांव स्तर तक बढ़ चलने से खौफ में हैं ग्रामीण लोग
जिलेवासियों को यह बात तो समझ आ गई है कि जिले में कोरोना वायरस के पांव अब गांव स्तर तक बढ़ चुके हैं। ऐसे में संक्रमण का फैलाव बड़ी संख्या में होना शुरू हो गया है। दरअसल कोरोना संक्रमण का ग्राफ जिले में जिस तरह से लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में जिले के बुद्धिजीवियों के जेहन में एक अहम और गंभीर सवाल यह भी पनप रहा है कि कैमूर जिले में जितने भी प्रवासी जो अब तक आ चुके हैं किस-किस के संपर्क में आए ? हालाकि ऐसी संभावनाओं के बाबत जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा इन बिन्दुओं को भी गंभीरता से लेते हुए पड़ताल कर रहा है।
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