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कुख्यात का शव देखने भी नहीं गए पिता, बोले-जुर्म की राह छोड़ने के लिए बहुत समझाया, जब नहीं सुधरा तो हमने ही उसे छोड़ दिया

कुख्यात का शव देखने भी नहीं गए पिता, बोले-जुर्म की राह छोड़ने के लिए बहुत समझाया, जब नहीं सुधरा तो हमने ही उसे छोड़ दिया

खगड़िया के पसराहा के थानेदार रहे आशीष सिंह की हत्या में शामिल 50 हजार के इनामी कुख्यात दिनेश मुनि की मुठभेड़ में मौत पुलिस महकमे के साथ थानेदार के परिजनों के लिए भी सुकून भरी है। कुख्यात की आपराधिक गतिविधियों से तंग आकर पिता कमलेश्वरी उर्फ महेश्वर मुनि ने भी उसका साथ छोड़ दिया था।

मौत के बाद पिता उसका शव देखने भी नहीं गए। कहा कि पूर्व में वह तिहाय पुनौर में परिवार के साथ रहकर जमींदार के यहां नौकरी करते थे। दिनेश की करतूतों को सुनकर उन्होंने कई बार उसे अपराध का रास्ता छोड़ने के लिए समझाया। लेकिन उसने नहीं सुनी। ऊपर से पुलिस भी हमेशा पूछताछ करती थी।

तंग आकर पैतृक गांव तिनमोही आकर बस गए। एक बीघा जमीन पर खेती व छोटी सी परचून की दुकान करने लगे। बताया कि गुरुवार सुबह उन्हें फोन से बेटे की मौत की खबर मिली। लेकिन वे शव देखने नहीं गए। पत्नी शव देखने गई।

शहीद की पत्नी बोलीं-डीजीपी का संकल्प पूरा

मेरे पति कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार पुलिसकर्मी थे। ड्यूटी के दौरान ही मुठभेड़ में अपराधी ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। उसे अपनेे कर्मों की सजा मिल गई। यह मेरे और पुलिस के लिए भी गर्व भरा है। ये बातें शहीद थानाध्यक्ष आशीष सिंह की पत्नी सरिता सिंह ने कहीं। वे इनदिनों बच्चों को लेकर पटना में हैं।

कहा कि पति की हत्या के बाद डीजीपी श्रद्धांजलि देने मेरी ससुराल आए थे। उन्होंने उसी समय संकल्प लिया था कि आशीष के हत्यारे को सजा दिलाकर रहेंगे। आज उन्होंने अपना संकल्प पूरा किया। सरिता के भाई और उदाकिशुनगंज के मुरली चंदवा निवासी अमर सिंह ने कहा कि सुबह में डीजीपी ने फोन कर जानकारी दी। यह सूचना परिवार के लिए सुकून भरी रही।



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कुख्यात की आपराधिक गतिविधियों से तंग आकर पिता कमलेश्वरी उर्फ महेश्वर मुनि ने भी उसका साथ छोड़ दिया था।


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