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बांस बल्ली के सहारे सिंचाई करने को खेतों तक बिजली ले जाने को मजबूर हैं किसान

बांस बल्ली के सहारे सिंचाई करने को खेतों तक बिजली ले जाने को मजबूर हैं किसान

मोहनिया अनुमंडल इलाके में खेतों में विद्युत प्रवाहित झूलते तार कभी भी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है। वजह है बांस बल्ली के सहारे सिंचाई करने को खेतों तक बिजली ले जाना। ऐसी स्थिति में तेज हवा बहने पर आपस में विद्युत प्रवाहित तार टकराकर खेतों में गिरने की भी संभावना बनी रहती है। इधर, इलाके के दर्जनों किसानों का कहना है कि कभी कभी पटवन कर रहे ट्यूबवेल बोरिग का मोटर पंप सेट भी वायर टकराने से जल जाता है। लेकिन संबन्धित विभाग इस समस्या का कोई निदान नहीं निकाल रहा है। दरअसल सरकार जहां किसानों की खेती को बढ़ावा देने के लिए बनाने के लिए लोगों को बिजली कनेक्शन लेने के लिए लगातार बढ़ावा दे रही है, वहीं अधिकारी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को भी अपनी कर्तव्य से सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं।

आधारभूत संरचना की घोर कमी से आए दिन जान-माल की क्षति हो रही है। कहीं जर्जर तार पर बिजली के करंट दौड़ रहे हैं तो कहीं बांस बल्ली के सहारे खेतों तक बिजली ले जाकर मौत को आमंत्रण दिया जा रहा है।कुछ ऐसा ही नजारा मोहनिया क्षेत्र के भोखरी, डंडवास पंचायत के छोटकी कुलड़िया, छोटका कटरा,कैथीयां सहित कई गांव में देखने को मिल रहा है। यहां के किसान खेतों में पटवन के लिए बांस बल्ली के सहारे विद्युत आपूर्ति करने को विवश हैं। प्रखंड के इन भागों की खेती पूरी तरह ट्यूबवेल पर आधारित है। किसानों ने बताया कि इसके लिए विद्युत कनेक्शन ले रखा है, लेकिन विभाग द्वारा अब तक विद्युत आपूर्ति की आधारभूत संरचना उपलब्ध नहीं कराई गई है। जिस कारण खेतों में पटवन के लिए उन्हें बांस बल्ली के सहारे ट्यूबवेल तक विद्युत आपूर्ति करनी पड़ती है, खतरे की संभावना बनी रहती है।

हजारों रुपयों का विद्युत विपत्र का भुगतान करते हैं इलाके के किसान, फिर भी नहीं हो रही सुनवाई
इस समस्या के संबंध में क्षेत्र के किसान निगम सिंह पंकज कुमार, जीत बंधन पाल, सुरेंद्र सिंह, संजय सिंह समेत अन्य लोगों ने कहा कि किसान हजारों रुपयों का विद्युत विपत्र का भुगतान रामगढ़ बिजली विभाग में प्रतिवर्ष करते हैं लेकिन विभाग द्वारा खेतों तक पोल व तार की व्यवस्था नहीं की गई। कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन अबतक से कोई कार्य नहीं हुई। जबकि खेती किसानी करने का समय नजदीक आ गया है अब कुछ ही दिनों में बरसात की शुरुआत हो जाएगी और हमें फिर से वही परेशानी से होकर गुजरना पड़ेगा। इधर खेती की बिजली की जर्जर व्यवस्था से किसानों के सपने हर साल तार-तार होते हैं।

सिंचाई के लिए गांव देहातों में बांस बल्ली के द्वारा ही विद्युत गुजरी है मगर बांस बल्ली को हटाने के लिए विद्युत विभाग लगातार प्रयासरत है। जल्द ही पोल गाड़ी जाएगी जिसके द्वारा विद्युत प्रवाहित तार इन्हीं पोलों के माध्यम से गांव देहातों में सिंचाई के लिए बिजली व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।
आजाद कुमार सिंह, सहायक अभियंता विद्युत,रामगढ़



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Farmers are forced to take electricity to the fields to irrigate with the help of bamboo bat


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