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पिता के गुजरने के बाद मैं नहीं पढ़ सका, मन में कसक थी, लॉकडाउन में गरीब बच्चों को पढ़ाकर पूरी कर रहा हूं

पिता के गुजरने के बाद मैं नहीं पढ़ सका, मन में कसक थी, लॉकडाउन में गरीब बच्चों को पढ़ाकर पूरी कर रहा हूं

नाथनगर थाने के चौकीदार सचिन उर्फ सिंघम पासवान ड्यूटी के साथ स्लम बस्ती के बच्चों में शिक्षित भी कर रहे हैं। इसमें उनके साथी चौकीदार कुंदन पासवान भी साथ दे रहे हैं। वे बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठाकर उन्हें ककहरा पढ़ाते हैं। इनके इस कार्य पर नाथनगर थाने का हर पुलिसवाला व चौकीदार गौरवान्वित महसूस कर रहा है। इंस्पेक्टर मो. सज्जाद हुसैन ने कहा, बस्ती के बच्चों का स्कूल में दाखिला करवाएंगे। कोरोना संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए एसएस बालिका उच्च विद्यालय के पास रेलवे केबिन के निकट निगरानी के लिए दोनों चौकीदारों की ड्यूटी लगी, जो जारी है। लॉकडाउन में शुरू यह पाठशाला ढाई महीने से चल रही है। ड्यूटी स्थल के पास ही स्लम बस्ती के दर्जनभर बच्चे चौकीदार सिंघम के नि: शुल्क पाठशाला में पढ़ रहे हैं।

पढ़ने को किताबें भी दी
चौकीदार सचिन ने कहा, बीएन कॉलेज से अानर्स की पढ़ाई कर रहा था। 2007 में पिता के स्वर्गवास के बाद पढ़ाई नहीं कर सका। परिवार की जिम्मेदारी आ पड़ी, पिता चौकीदार थे, उनकी जगह चौकीदारी मिली। पढ़ने-पढ़ाने की कसक थी, जो लॉकडाउन में बच्चों को पढ़ाकर पूरी कर रहा हूं। सड़कों पर सन्नाटा था। स्लम के बच्चों को कूड़ा चुनते देखा। एक बच्चे राजकुमार से पूछा तो बोला, पढ़ना चाहता हूं पर गरीबी है। तब से पढ़ा रहा हूं। अभी 12 बच्चे हैं। उन्हें कॉपी, पेंसिल,किताबें भी दी। ड्यूटी में शाम 3-5 तक पढ़ाता हूं।

बच्चे बोले-सिंघम सर हमें प्यार से पढ़ाते हैं
दलित बच्चे राजकुमार, छोटू, गौरव, कृष्णा, विवेक, शुभम आदि ने बताया कि सिंघम चौकीदार सर हमलोगों को बड़े प्यार से पढ़ाते हैं। बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि पहले बच्चे खेल-कूद कर यहीं समय बिताते थे, जब से चौकीदार सर ने पढ़ाना शुरू किए हैं तब से बच्चे ज्यादातर समय पढ़ाई में बिताते हैं। इससे उनका भविष्य संवरता हुआ दिख रहा है।



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ड्यूटी के दौरान बच्चों को पढ़ाते चौकीदार सचिन।


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