12 साल में वजीरगंज के एरू स्टील प्रोसेसिंग यूनिट की भूमि पूजन से आगे नहीं बढ़ा काम
ऐसे समय में जब प्रवासी श्रमिक दूसरे राज्य से जिले में वापस लौट रहे हैं, उद्योग-धंधे का नहीं होना उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की कड़ी में अड़चन डाल रहा है। न तो सरकार ने और न ही निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान दिया। पहले के उद्योग बंद कर दिए गए और प्रस्तावित उद्योगों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। विभाजित बिहार में उद्योग-धंधे नहीं हैं। ऐसे में अगर केन्द्र सरकार द्वारा उद्योग लगाने की योजना पर
अमल सूबे की सरकार नहीं करें, तब क्या कहा जा सकता है। 2008 में केन्द्र सरकार ने गया के वजीरगंज प्रखंड अंतर्गत एरु में स्टील प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का निश्चय किया था व इसके लिए 200 करोड़ रुपए का आवंटन भी किया। भूमि पूजन भी हुआ व चहारदीवारी बनने का टेंडर भी हुआ, लेकिन आज सूबे की सरकार की इच्छाशक्ति की कमी के कारण इसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका।
30 एकड़ में बनना है परिसर
गया से लगभग 25 किमी पूरब वजीरगंज में एरु गांव है। 2008 में तीन दिसम्बर को तत्कालीन केन्द्रीय इस्पात व उर्वरक मंत्री रामविलास पासवान ने यहां स्टील प्रोसेसिंग यूनिट के लिए भूमि पूजन किया था। यह यूनिट 27.3 एकड़ में प्रस्तावित है व 2.30 करोड़ रुपए से भूमि का अर्जन स्टील अथोरिटी आॅफ इंडिया(सेल) ने किया था।
बनता एक लाख यूनिट टीएमटी
इस यूनिट में एक लाख यूनिट(थर्मो मेकेनिकली ट्रीटेड) टीएमटी के निर्माण का प्रस्ताव है। टीएमटी का उपयोग सिविल निर्माण कार्य में किया जाता है। भारत में गया के अलावा बिहार के दो अन्य जगहों पर प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव है। इनमें से एक का काम पूरा हो चुका है और उत्पादन हो रहा है।
नहीं बनी चहारदीवारी
भूमि पूजन के बाद सेल ने चहारदीवारी निर्माण के लिए टेंडर भी निकाला। मिट्टी की जांच हुई, लेकिन अचानक काम को रोक दिया गया। सेल ने वजीरगंज में ग्रिड उपकेन्द्र निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग भी किया। इसे चार से छह मेगावाट बिजली की जरूरत पड़ती।
30 एकड़ जमीन का हुआ था अधिग्रहण
30 एकड़ रैयती जमीन सरकार द्वारा अधिग्रहित किया गया था। इसमें एरू गांव के सभी वर्ग के 60 लोगों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। अक्षय कुमार सिंह, बवन पासवान, नरेन्द्र सिंह, युगल सिंह, शंभू सिंह, मोहन सिंह, देवेंद्र सिंह, विजय सिंह, अजय सिंह, अभय कुमार सिंह , मधुसुदन सिंह, बिरजू सिंह, श्लोक सिंह, शिव पूजन सिंह, दिनेश सिंह, सूबेदार पासवान, आदि की जमीन अधिग्रहित की गई थी।
एनओसी के बाद अटका काम
यूनिट में काम शुरू नहीं होने का मामला 15 दिसंबर 2011 को राज्यसभा में लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामविलास पासवान ने राज्यसभा में उठाया था। उन्हें संबंधित विभाग के मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि बिहार सरकार ने एनओसी नहीं दिया है। कृषि भूमि को औद्योगिक भूमि में परिवर्तित कर उसके स्वरुप को 2013 में बदला गया।
शर्त ने अटकाया काम
एरू स्टील प्रोसेसिंग यूनिट संघर्ष समिति के कंवेनर विजय कुमार मिट्ठु ने कहा, एक साल पहले केंद्रीय इस्पात मंत्री ने 50 फीसदी रॉ मेटेरियल स्क्रैप के रूप में राज्य सरकार को खुद उपलब्ध कराने व तैयार टीएमटी का 50 फीसदी खुद खरीदने का शर्त लगाया था।
कहते हैं विधायक
व्यक्तिगत पहल पर यह महत्वाकांक्षी योजना गया को मिली थी। 12 साल में इस योजना का क्रियान्वयन नहीं होना राज्य सरकार की नाकामी है। अगर जिले में उद्योग होते, तब लोगों को रोजगार मिलता। कुमार सर्वजीत, विधायक बोधगया विधान सभा क्षेत्र
व्यक्तिगत पहल पर यह महत्वाकांक्षी योजना गया को मिली थी। 12 साल में इस योजना का क्रियान्वयन नहीं होना राज्य सरकार की नाकामी है। अगर जिले में उद्योग होते, तब लोगों को रोजगार मिलता।
अवधेश कुमार सिंह, विधायक, वजीरगंज विधान सभा क्षेत्र
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