ओलावृष्टि से बर्बाद हुई थी लाखों की फसल, सर्वर डाउन होने से मुआवजे के लिए नहीं कर पा रहे आवेदन
मार्च- अप्रैल में ओला वृष्टि से किसानों की रबी की फसल तबाह हो गई थी। किसान खून के आंसू रो रहें थे। किसानों के आंसू पोछने के लिए सरकार ने इनपुट सब्सिडी के माध्यम से किसानों को अधिकतम साढ़े तेरह हजार क्षतिपूर्ति देने की घोषणा किया था। इसके लिए किसानों को सरकारी बेव पोर्टल इनपुट सब्सिडी रबी मौसम (आकस्मिक वर्षा/ओलावृष्टि) 2019 - 20 पर ऑनलाइन आवेदन करना था। जिसका तिथि 6 अप्रैल से 18 अपैल तक था। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते लॉक डाउन व प्रचार प्रसार नहीं होने के कारण जानकारी के अभाव में ज्यादातर किसान आवेदन नहीं कर पाए।
जिसको देखते हुए किसानों के शिकायत पर सरकार ने दुबारा तिथि निर्धारित की। जो 4 मई से 11 मई है। जिसमे शर्त रखा गया कि आवेदन सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक ही पोर्टल खुलेगा। नई तिथि के घोषणा तो कर दिया गया लेकिन सर्वर डाउन रहने के कारण पोर्टल खुल ही नहीं रहा है। किसान सुबह से शाम तक ऑनलाइन दुकान के आगे इंतजार करते परेशान हो रहें है। कोरोना संक्रमण के चलते सोशल डिस्टेन्स का भी पालन करना है। ऐसे में किसान दिन भर धूप में खड़े होकर बीमार हो रहें है।
दाउदनगर में भी किसानों को हुआ नुकसान, किसानों की बढ़ी चिंता
दाउदनगर प्रखंड में भी किसानों को मार्च माह में हुए ओलावृष्टि से काफी नुकसान हुआ था। जिससे किसान परेशान थे। वहीं इधर कोरोना वायरस ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी। विभागीय जानकारी के अनुसार प्रखंड में ओलावृष्टि से 79 हेक्टेयर में लगा जौ, 240 हेक्टेयर में लगा चना, 562 हेक्टेयर में लगा मसूर, 64 हेक्टेयर में लगा मटर व 48 हेक्टेयर में लगा सरसो का फसल बर्बाद हुआ था। जिसका सर्वे भी कराया गया था। इससे हजारों किसान प्रभावित हुए थे। वहीं लाॅकडाउन लागू होने के कारण गेहूं की कटाई भी काफी प्रभावित हुई है। जिससे किानां पर दोहरी मार पड़ी है। हालांकि दाउदनगर प्रखंड में पिछले बार ही लगभग एक हजार से ज्यादा किसानों ने क्षतिपूर्ति मुआवजा के लिए आवेदन किया था। नए तिथि घोषणा हाेने के बाद कितने किसानों ने विभाग के पोर्टल पर आवेदन किया है। इसकी जानकारी नहीं है।
हसपुरा में चार दिनों में मात्र 6 किसानों का ही हो पाया ऑनलाइन आवेदन
परेशानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हसपुरा प्रखंड में इनपुट सब्सिडी चार दिनों के अंदर शुक्रवार तक प्रखंड में मात्र 5 से 6 किसानों का ही आवेदन जमा हो पाया है। ऐसे में किसान अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। ऑनलाइन संचालक राजेश कुमार ने बताया कि पहले 24 घंटे पोर्टल पर आवेदन लिया जा रहा था। जिसके कारण रात व सुबह 6 बजे तक जब नेट का ट्रैफिक कम रहता था तो किसानों का ऑनलाइन हो जाता था। अब एक भी किसान का ऑनलाइन नहीं हो पा रहा है। वहीं ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि में महज तीन से चार दिन का समय बचा है। इस स्थिति में उनका आवेदन हो पाएगा की नहीं। जबकि हजारों निबंधित किसान हैं।
बोले कृषि पदाधिकारी-प्रखंड कृषि पदाधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि पोर्टल पर क्षतिपूर्ति मुआवजा के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाना है। जो किसान आवेदन करेंगे। उन्हें जांच के बाद खाते में ही क्षतिपूर्ति के तहत मुआवजा की राशि मिलेगी।
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