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सेंटर प्रभारी ने प्रवासियाें को रखने से किया मना रातभर बगीचे में रहे, सुबह चले गए अपने-अपने घर

सेंटर प्रभारी ने प्रवासियाें को रखने से किया मना रातभर बगीचे में रहे, सुबह चले गए अपने-अपने घर

प्रवासी मजदूरों के साथ किस तरह से दुर्व्यवहार किया जा रहा है इसका उदाहरण डमरापुर पंचायत के आवासीय विद्यालय भिरभिरिया में बने क्वारेंटाइन सेंटर में देखने को मिला। चक्रसन और सहनौला गांव के 27 प्रवासी मजदूरों को बुधवार की शाम प्रखंड कार्यालय में थर्मल स्क्रीनिंग कराने के बाद उन्हें भिरभिरिया क्वारेंटाइन सेंटर में भेजा गया। लेकिन वहां कैंप प्रभारी राजेंद्र यादव ने इन मजदूरों को सेंटर में रखने से मना कर दिया। इसके बाद परेशान मजदूर इधर-उधर देखते रहे और अंतत: पास के ही बगीचे में पूरी रात काटी। सुबह में ये प्रवासी मजदूर अपने अपने घर को चले गए। क्वारेंटाइन सेंटर पहुंचे 27 मजदूरों में से अधिकतर चंडीगढ और दिल्ली से आए थे
कैंप प्रभारी ने बताया कि उनके पास फिलहाल चाबी नहीं है। इसके बाद सेंटर प्रभारी ने यह भी कहा कि अभी सेंटर की सफाई नहीं की गई है, इसलिए वे उनको अंदर आने की इजाजत नहीं दे सकते। जब मजदूरों को उक्त क्वारेंटाइन सेंटर में रहने की इजाजत नहीं मिली तो वे लोग रात भर विद्यालय के सामने बगीचा में रात काटा।
प्रवासियों ने आस-पास के लाेगाें से मांग कर खाना खाया
बाहर से भय के माहौल में पहुंचे इन मजदूरों ने कई घंटे तक बिना कुछ खाए पिए ही बगीचे में रात काटी। मजदूरों ने बताया कि मच्छरों के प्रकोप के कारण भी वे सो नहीं पा रहे थे। कई मजदूरों ने तो अपने पास रखे बिस्कुट खाए तो कई मजदूरों से जब भूख बर्दाश्त नहीं हुई तो उनलोगों ने आसपास के ग्रामीणों से मांग की भोजन किया। चौहट्टा पंचायत के मुखिया गोविंद महतो एवं सरपंच विकास कुमार ने भी बताया कि उन लोगाें ने जब देखा कि मजदूर बगीचे में रहने को विवश हो रहे हैं तो उन्होंने मैनाटांड़ सीओ और कैंप प्रभारी से लगातार संपर्क करने की कोशिश की लेकिन प्रयास विफल हो गया। दूसरे दिन सुबह बारी बारी से बगीचे से निकलकर सब प्रवासी मजदूर अपने घर को लौट गये।
घर पहुंचने से ग्रामीणों में है दहशत
इन प्रवासी मजदूरों के घर के लौटने पर गांव में भी दहशत का माहौल है। नाम नहीं छपने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि इन मजदूरों के आने से ग्रामीण दहशत में है। पता नहीं कब किसको कोराेना का संक्रमण हो जाए। ग्रामीण यह चाहते है कि ये सभी मजदूर पहले क्वारेंटाइन सेंटर में जाए और वहां पर निर्धारित अवधि बिताने के बाद ही वे अपने अपने घरों में रहे। इन मजदूरों के परिजन भी खासे भयभीत है।
सीओ द्वारा आदेश नहीं दिया गया : कैंप प्रभारी
भिरभिरिया क्वारेंटाइन सेंटर के प्रभारी शिक्षक राजेंद्र यादव ने बताया कि इन प्रवासी मजदूरों के आने के पहले साफ सफाई का काम चल रहा था। सीओ अनिल भूषण के द्वारा अभी कोई आदेश नहीं था कि प्रवासी मजदूरों को रखा जाए। आदेश मिलता तो प्रवासी मजदूरों को रखा ही जाता। इधर, सीओ अनिल भूषण ने मोबाइल रिसीव नहीं किया इसलिए बात नहीं हो पाई।
क्वारेंटाइन सेंटर पर हो रही थी सफाई
क्वारेंटाइन सेंटर में सफाई का काम चल रहा था इसलिए मजदूराें को वहां के इंचार्ज ने अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। इससे नाराज होकर मजदूर पास के बगीचे में चले गए। उनको वहां पर भोजन उपलब्ध करा दिया गया था। -राजकिशोर शर्मा, बीडीओ



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क्वारेंटाइन सेंटर के बाहर विरोध प्रदर्शन करते प्रवासी मजदूर।


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