साइकिल से दो प्रवासी मुंबई-दिल्ली से आए, धरती को किया प्रणाम
बूढ़े मां बाप और बच्चों की चिंता में जमा पूंजी से साइकिल खरीदी और घर के लिए निकल पड़े। दो प्रवासी मजदूर साइकिल चलाकर घर पहुंचे। दोनों प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के कारण मुंबई और दिल्ली में फंसे हुए थे। जैसे ही दोनों अंधराठाढ़ी क्वारेंटाइन सेंटर पहुंचे उन्होंने धरती को चूमा और उनकी आखों से आंसू बहने लगे। इसके बाद क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहे अन्य लोगों ने उन्हें संभाला। 45 वर्षीय गंगद्वार गांव निवासी अमित भगत मुम्बई से निकले थे। 12 दिनों का सफर तय कर रविवार को घर पहुंचे। वहीं, रुद्रपुर थाना के बरसाम गांव निवासी 34 वर्षीय मिथिलेश यादव साइकिल चलाते आठ दोनों बाद दिल्ली से घर पहुंचे। दोनों मजदूरों की दृढ़ इच्छा शक्ति ने हजार किमी दूरी को साइकिल से यात्रा तय कर लिए। दोनों प्रवासियों की जांच के बाद स्थानीय महंत राजेश्वर गिरी प्लस टू उच्च विद्यायल के क्वारेंटाइन सेंटर में रखा गया है।
प्रवासियों ने बताया- हजारों लोग रास्ते में दिखे, वे पैदल आ रहे हैं
दोनों प्रवासियों ने बताया कि बढ़ते कोराना संकट से खुद घबरा कर परिवार बच्चों के एक झलक देखने की उम्मीद लिए घर निकल पड़े। उन्होंने बताया कि हजारों की संख्या में मजदूर परिवार बच्चों के साथ पैदल ही घर के निकल पड़े हैं, जो रास्ते में है। उनकी माने तो उन्हें यात्रा में आम लोगों से काफी सहयोग मिल रहा है। लॉक डाउन अनुपालन में जुटे कर्मी द्वारा सख्ती बरती जाती है। सरकार को चाहिए कि पैदल यात्रा करने वाले मजदूरों को साधन जुटा कर घर भेज दे। अब बाहर फंसे मजदूरों के धैर्य जवाब दे दिया है। लॉकडाउन के कारण काम बंद हो गया। बस-ट्रेन चलना बंद है। खाने पीने की समस्या बढ़ गई थी। मकान मालिक भी किराए के लिए दबाव बनाने लगा था। करीब 1700 किलोमीटर की दूरी राजमार्ग से तय किया।
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