गुनाहों से तौबा करके अल्लाह से अपनी मगफिरत करवा लें
लॉकडाउन के बीच रमजान का पाक महीना चल रहा है। इस मुबारक महीने को बरकत वाला महीना भी कहा जाता है। शहर के हुसैन चौक स्थित जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती मोहम्मद अकबर अली कासमी ने बताया कि रमजान का पहला आसरा जो कि रहमत का था, वह बीत चुका है।
जिन्होंने इस आसरे में गुनाहों से तौबा किया और हर इबादत करके अल्लाह को राजी कर लिया। उसके लिए रमजान का पहला आसरा रहमत ही रहमत है। बताया कि बहुत से इमान वाले ऐसे भी होते हैं, जिनके जिम्में कोई गुनाह नहीं होता है। उसके लिए रमजान का पहला आसरा शुरु से ही रहमत ही रहमत है। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपने गुनाहो से तौबा इस्तीगफार करके अपने को रबे कायनात से माफ करवा लेते हैं। उनके लिए पहला आसरा रहमत ही रहमत है। अब जबकि दूसरा आसरा मगफिरत का चल रहा है। जो मुसलमान पहले आसरे को किसी वजह से कदर नहीं कर सके। उनके लिए अब मौका है कि इस मगफिरत वाले आसरे में अपने गुनाहों से तौबा करके अल्लाह से अपनी मगफिरत करवा लें। साथ ही उन्होंने रोजेदारों से वैश्विक काेरोना जैसी महामारी से लोगों को निजात दिलाने के लिए भी खुदा से इबादत की बात कही।
वे शख्स बदनसीब हैं, रमजान में जिनके मगफिरत ना हो : मुफ्ती कासमी ने बताया कि हदीश-ए-पाक में आता है कि रमजान में भी जिसके मगफिरत ना हो, वे शख्स बदनसीब होते हैं। इसलिए तमाम मुसलमानों चाहिए कि इस मगफिरत वाले आसरेे में तमाम गुनाहों से तौबा करके नमाज, तरवदी, तिलावत व दिगर-ए-इबादत के जरिए अल्लाह से अपनी मगफिरत करवा लें। इस आसरे में अहम बात ये है कि हम रोजा रखकर अल्लाह से अपने गुनाहों को माफ करवा लें। उन्होंने कहा कि रोजा का मतलब यह नहीं है कि सुबह से शाम तक भूखा रहना। बल्कि अपने तमात आजा को नासाइस्ता हराकात से बचाएं।
हर जरूरतमंदों की करें मदद: ईमाम मुफ्ती कासमी ने बताया कि राेजा रखकर भूख व प्यास का पता चलता है। इसलिए रोजेदार को हर मजबूर इंसान की अपनी हैसियत के हिसाब से मदद करें। कहा जो मजबूर, फकीर और बहुत गरीब होते हैं। जिनके पास खाने, पीने के समान और पैसे नहीं हैं।
इन छह चीजों से पूरा होता है रोजा
मुफ्ती कासमी ने बताया कि रोजा छह चीजों से पूरा होता है। जिसमें पहला रोजेदारों को अपनी आंखों से हर ऐसी चीजों से बचाना चाहिए, जो खुदा की तरफ से दिल को फेरती है। बेफाइदा बातों से जुबान को बचाना, तीसरा कानों से बुरी बातों को नहीं सुनना चाहिए। क्योंकि घीवत व झूठ को सुनने वाले भी कहने वाले के गुनाह में शरीक होते हैं। चौथा हाथ-पांव बगैरह आजा को गुनाहों से बचाएं, पांचवा इफ्तार के वक्त हराम और मुस्तवा चीजे नहीं खाएं।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://www.bhaskar.com/local/bihar/bhagalpur/supaul/news/get-rid-of-crimes-and-get-allah-to-plead-with-you-127282738.html
https://i9.dainikbhaskar.com/thumbnails/680x588/web2images/www.bhaskar.com/2020/05/08/dbcl272158893547208photosup100_1588962438.jpg
0 Response to "गुनाहों से तौबा करके अल्लाह से अपनी मगफिरत करवा लें"
Post a Comment