Popular Posts

गयासुर राक्षस जाग न जाए इसलिए शव की जगह पुतला का दहन कर कायम रखी एक पिंड और मुंड की परंपरा

गयासुर राक्षस जाग न जाए इसलिए शव की जगह पुतला का दहन कर कायम रखी एक पिंड और मुंड की परंपरा

(दीपक कुमार)मोक्षभूमि “गयाजी’...। एक ऐसी जमीं जहां भगवान विष्णु के पदचिह्न हैं। “पालनहार’ मां सती है। शास्त्र व पुराणों की मानें तो गयासुर ने भगवान विष्णु से हर दिन एक मुंड व एक पिंड का वरदान मांगा था। उस वरदान के बाद से ही यह परंपरा सनातन काल से चली आ रही हैं। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से पूरा देश लॉकडाउन है।

“पितृमुक्ति’ के लिए एक भी तीर्थयात्री गयाजी नहीं आ रहे हैं। पिंडदान का कर्मकांड टूटे नहीं, इसके लिए स्थानीय पंडों ने अपने ऊपर जिम्मेवारी उठा रखी हैं। हर दिन पंडा समाज का एक सदस्य विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह में पिंडदान के कर्मकांड को पूरा कर रहा है। अब एक मंुड की परंपरा को श्मशान घाट के लोग पूरा रहे हैं। लेकिन, बुधवार काे देर शाम तक श्मशान घाट में एक भी शव अंत्येष्टि के लिए नहीं पहुंचा। इसके बाद डोम राजा के नेतृत्व में एक मुंड की परंपरा को पूरा करने के लिए पुतला बना।
ठठड़ी से पुतला को बांधा गया, फिर धार्मिक मंत्रों के साथ पुतला का दाह संस्कार किया गया। पिंड भी प्रदान किया गया। बता दें कि पुतला को अज्ञात शव मान कर्मकांड किया गया था। मान्यता है कि जिस दिन यह परंपरा टूटेगी उस दिन गयासुर जाग जाएगा। सनातन काल से चली आ रही परंपरा को निर्वहण करने के लिए करीब तीन फीट का पुतला बनाया गया।
औसतन पहुंच रहे थे पांच से दस शव, पिंडदान करने वाले भी नहीं आ रहे हैं
श्मशान घाट के डोम राजा हीरा राम ने बताया कि लॉकडाउन की अवधि में औसतन पांच से दस शव हर दिन पहुंच रहे थे। लॉकडाउन के पूर्व प्रतिदिन संख्या 15 से 20 थी। बुधवार की देर शाम तक दाह संस्कार के लिए एक भी शव श्मशान घाट पर नहीं पहुंचा। लॉकडाउन के कारण रात्रि में दाह संस्कार के लिए न के बराबर लोग आ रहे हैं। इस वजह से परंपरा का निर्वहण करने के लिए पुतला को ठठड़ी में बांध अत्येष्टि की गई। डोम राजा ने बताया कि गया श्मशान घाट में एक भी शव नहीं जला।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
पिंडदान का कर्मकांड टूटे नहीं, इसके लिए स्थानीय पंडों ने अपने ऊपर जिम्मेवारी उठा रखी हैं।


from Dainik Bhaskar https://www.bhaskar.com/local/bihar/gaya/news/gayaasur-demon-does-not-wake-up-so-the-effigy-of-the-body-is-kept-alive-by-burning-the-effigy-in-place-of-the-body-127324162.html
https://i9.dainikbhaskar.com/thumbnails/680x588/web2images/www.bhaskar.com/2020/05/21/orig__1590019888.jpg

0 Response to "गयासुर राक्षस जाग न जाए इसलिए शव की जगह पुतला का दहन कर कायम रखी एक पिंड और मुंड की परंपरा"

Post a Comment